यूजीसी बिल पर सुप्रीम कोर्ट की रोक-कानपुर के छात्रों ने ली राहत की सांस

 

छात्र बोले- शिक्षा जोड़ने का माध्यम, बांटने का नहींं

 

 

 

विवादों में घिरे यूजीसी बिल पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद देशभर के छात्रों में राहत का माहौल है. कानपुर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान एचबीटीयू के छात्रों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह बिल कैंपस के सौहार्दपूर्ण माहौल को नुकसान पहुंचा सकता था. छात्रों का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य समाज को जोड़ना है, न कि डर और विभाजन पैदा करना।

देशभर में विवादों में घिरे यूजीसी बिल पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद छात्रों ने राहत की सांस ली है. अदालत ने इस बिल के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक लगाते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. लगातार हो रहे विरोध, छात्र संगठनों की आपत्तियों और आशंकाओं को देखते हुए यह फैसला लिया गया. कानपुर में भी इस फैसले को लेकर छात्रों में संतोष और खुशी का माहौल है.सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर कानपुर के शैक्षणिक माहौल में साफ तौर पर देखने को मिल रहा है. शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी में छात्रों ने खुलकर अपनी राय रखी. लोकल 18 की टीम जब एचबीटीयू पहुंची तो छात्रों ने एक स्वर में कहा कि यूजीसी बिल पर रोक बेहद जरूरी थी.

एचबीटीयू के छात्र अमन गुप्ता ने कहा कि यूजीसी बिल पर रोक लगना बहुत जरूरी था. उनका कहना था कि सरकार को इस तरह का बिल बनाने से पहले छात्रों से बातचीत करनी चाहिए थी. अमन ने कहा कि यह बिल छात्रों के बीच विभाजन पैदा कर सकता था. हम कॉलेज में पढ़ाई करने आते हैं, न कि जाति या धर्म के आधार पर बंटने के लिए.

छात्रों का मानना है कि अगर समय रहते इस बिल पर रोक नहीं लगती तो इसका सीधा असर कॉलेज कैंपस के माहौल पर पड़ता. पढ़ाई के बजाय छात्रों के बीच तनाव और भ्रम की स्थिति बन जाती. एचबीटीयू के छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य ज्ञान देना है, न कि डर और असुरक्षा का माहौल बनाना.एचबीटीयू के छात्रों ने बताया कि कानपुर के कॉलेजों में पढ़ाई का माहौल काफी सौहार्दपूर्ण है. एक छात्र ने कहा कि यहां दोस्त अलग-अलग धर्म और जाति से होते हैं, लेकिन इन बातों पर कभी चर्चा नहीं होती. कॉलेज में सभी छात्र बराबर होते हैं. मजाक में बातें जरूर होती हैं, लेकिन उसमें किसी तरह का भेदभाव नहीं होता.छात्रों ने यूजीसी बिल से जुड़े संभावित दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताईं. अमन गुप्ता ने कहा कि आज अगर किसी जनरल कैटेगरी के छात्र पर गलत तरीके से एससी-एसटी एक्ट लग जाए तो उसका पूरा जीवन और करियर बर्बाद हो सकता है. अगर ऐसी चीजें कॉलेज के दिनों से शुरू हो जाएं तो भविष्य पर गहरा असर पड़ेगा.छात्रों का कहना है कि शिक्षा का मूल उद्देश्य समाज को जोड़ना है. कॉलेज और विश्वविद्यालय ऐसे स्थान होने चाहिए जहां सभी बिना डर के पढ़ाई कर सकें. किसी भी कानून से अगर छात्रों के मन में भय या भ्रम पैदा होता है तो वह शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक हो सकता है.

कानपुर के छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का खुलकर स्वागत किया है. उनका कहना है कि यह फैसला छात्रों के हित में है और देश के शैक्षणिक माहौल को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी था. इससे यह संदेश गया है कि छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.छात्रों को उम्मीद है कि भविष्य में सरकार कोई भी शैक्षणिक फैसला लेने से पहले छात्रों की राय जरूर सुनेगी. उनका मानना है कि कॉलेज और विश्वविद्यालय राजनीति या सामाजिक विभाजन का केंद्र नहीं बल्कि शिक्षा, समानता और भाईचारे का स्थान बने रहने चाहिए.

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