सीएसजेएम यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स बना रहे भविष्य के ‘सुपर ऐप’

—’हैकशोध 2026′ में 24 घंटे जागकर छात्र दे रहे कोडिंग से समाधान

– यूनिवर्सिटी देगी बिजनेस शुरू करने के लिए पैसा, मुख्यमंत्री के ‘डिजिटल यूपी’ को मिल रही मजबूती

कानपुर, 30 जनवरी छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर अब पढ़ाई के साथ-साथ नए विचारों और तकनीक के लिए भी पहचान बना रहा है। यहां आयोजित 24 घंटे के राष्ट्रीय हैकाथॉन “हैकशोध” ने देशभर के युवाओं को एक मंच पर लाकर उनकी सोच, मेहनत और तकनीकी समझ को सामने रखा। स्टूडेंट्स योगी सरकार के प्रदेश को डिजिटल और स्टार्टअप हब के रूप में बनाने के विज़न को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ते दिख रहे हैं।

*24 घंटे का ‘नॉन-स्टॉप’ मिशन*
इस राष्ट्रीय हैकाथॉन में देश के कोने-कोने से आए इंजीनियरिंग के 150 चुनिंदा छात्र हिस्सा ले रहे हैं। कुल 50 टीमें बनाई गई हैं, जिनमें हर टीम में 3-3 छात्र शामिल हैं। इन छात्रों के पास शनिवार दोपहर 1 बजे तक का वक्त है, जिसमें उन्हें कंप्यूटर स्क्रीन पर अपनी कोडिंग के जरिए एक चलता-फिरता ‘वर्किंग मॉडल’ तैयार करना है।

*इन 5 बड़ी चुनौतियों पर हो रहा है वार*
यूनिवर्सिटी ने छात्रों के सामने देश की 5 ऐसी बड़ी समस्याएं रखी हैं, जिन पर काम करना योगी सरकार की प्राथमिकता में है:
1. साइबर सिक्योरिटी: ऑनलाइन ठगी और डेटा चोरी रोकने के अचूक हथियार।
2. AI और डेटा साइंस: AI के जरिए कामकाज को आसान बनाना।
3. सस्टेनेबिलिटी: पर्यावरण को बचाने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के तरीके।
4. इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT): मशीनों और गैजेट्स को आपस में जोड़कर स्मार्ट लाइफ बनाना।
5. ओपन इनोवेशन: सामाजिक समस्याओं से जुड़े ऐसे अनोखे आइडिया जो बदलाव लाएँ।

स्कूल के बच्चे भी शामिल
हैकशोध की खास बात यह है कि यहाँ सिर्फ इंजीनियरिंग के छात्र ही नहीं, बल्कि स्कूल के छोटे बच्चों ने भी हिस्सा लिया। जहाँ इंजीनियर कोडिंग कर रहे थे, वहीं स्कूली बच्चों ने ‘आइडिया पिच’ के जरिए बताया कि वे आने वाले समय में किस तरह की तकनीक देखना चाहते हैं।

*60,000 की पुरस्कार राशि*
विजेताओं का उत्साह बढ़ाने के लिए यूनिवर्सिटी ने ₹60,000 से अधिक की राशि तय की है:
• प्रथम पुरस्कार: ₹25,000 (विजेता टीम के लिए)
• द्वितीय पुरस्कार: ₹15,000
• तृतीय पुरस्कार: ₹10,000

स्टार्टअप के लिए मिलेगी ‘सीड फंडिंग’
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में यूनिवर्सिटी ने यह भी साफ किया है कि यह कोडिंग सिर्फ एक खेल नहीं है। जिन टीमों के आइडिया दमदार होंगे, उन्हें यूनिवर्सिटी का ‘इनोवेशन सेल’ गोद लेगा। उन्हें खुद की कंपनी (स्टार्टअप) शुरू करने के लिए सीड फंडिंग (शुरुआती निवेश), दफ्तर के लिए जगह और विशेषज्ञ सलाह दी जाएगी, ताकि यूपी का टैलेंट यहीं रहकर रोजगार पैदा कर सके।

क्या-क्या खास बना?
• लीगल सेंटिनल: एक टीम ने ऐसा AI सिस्टम बनाया जो भारतीय कानूनों को आसानी से समझा सकता है।
• स्मार्ट वाटर: शहर में पाइपलाइन से पानी की बर्बादी रोकने के लिए IoT आधारित सेंसर का मॉडल पेश किया गया।
• सुरक्षित घर: महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए आवाज (ऑडियो AI) से चलने वाला स्मार्ट होम सिस्टम भी आकर्षण का केंद्र रहा।

इन्होंने निभाया बड़ा रोल
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में छात्र लीडर्स की बड़ी मेहनत रही। अवनि यादव (अध्यक्ष, स्टूडेंट काउंसिल) और दिव्यांश मिश्रा ने अपनी टीम के साथ मिलकर मैनेजमेंट संभाला। वहीं वीएफएस ग्लोबल के सीईओ आशीष कौल और एआई एक्सपर्ट दीप्ति ने दिल्ली और मुंबई से आकर बच्चों के काम को परखा और उन्हें ग्लोबल लेवल के टिप्स दिए।

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