पार्षद की शिकायत पर कोर्ट ने लिया संज्ञान, परमट विद्यालय नीलामी पर सवाल
कानपुर।
बीजेपी पार्षद विकास जायसवाल की शिकायत पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए परमट स्थित प्राथमिक विद्यालय की नीलामी प्रक्रिया को लेकर सुनवाई शुरू कर दी है। पार्षद का आरोप है कि विद्यालय की नीलामी पूरी तरह अवैध तरीके से की गई, जिसमें न तो किसी वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया और न ही तकनीकी नियमों को ध्यान में रखा गया।
पार्षद का यह भी कहना है कि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के लिए किसी प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, जो सीधे तौर पर शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। इस संबंध में पार्षद द्वारा अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिसे स्वीकार करते हुए न्यायालय ने जिम्मेदार पक्षकारों को नोटिस जारी किया है।
मामले में प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग (PWD) और बेसिक शिक्षा अधिकारी को प्रतिवादी बनाया गया है। कोर्ट की कार्यवाही के बीच ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा विद्यालय भवन को ध्वस्त करने के आदेश पुनः जारी कर दिए गए, जिससे मामले पर और गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह मुद्दा विधान परिषद में भी उठाया गया, जहां संबंधित समिति ने संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया। आरोप है कि समिति द्वारा संज्ञान लिए जाने के महज दो दिन के भीतर ही विद्यालय भवन में तोड़फोड़ शुरू करा दी गई, ताकि समिति के सामने सच्चाई आने से पहले ही साक्ष्य समाप्त किए जा सकें।
इतना ही नहीं, कोर्ट में दाखिल किए गए शपथपत्र में यह कहा गया कि विद्यालय में कोई बच्चा अध्ययनरत नहीं है, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत बताई जा रही है। वहीं, विद्यालय से निकले मलबे, ईंट, सरिया और गेट आदि की कीमत न्यूनतम नीलामी में मात्र 5,424.30 रुपये दर्शाई गई, जिसे पार्षद ने नीलामीकर्ताओं से मिलीभगत का परिणाम बताया है।

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