धर्म, न्याय, सेवा और सामाजिक समरसता की जो मिसाल प्रस्तुत की

 

 

कानपुर, अखिल भारतीय पाल महासभा शाखा कानपुर नगर लोकमाता पुण्यश्लोका राजमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के सम्मान में संसद परिसर में समाजवादी पार्टी के सांसदगणों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन का हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करती है। यह विरोध देश की ऐतिहासिक विरासत, सामाजिक न्याय और महापुरुषों के सम्मान की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक और सराहनीय कदम है।अखिल भारतीय पाल महासभा युवा के प्रदेश अध्यक्ष सियाराम पाल(एडवोकेट) का स्पष्ट मत है कि काशी में मकर द्वार के समीप लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी द्वारा निर्मित मणिकर्णिका घाट, मणि चौतरा एवं उनसे जुड़ी ऐतिहासिक प्रतिमाओं को तोड़ा जाना न केवल पाल समाज, बल्कि पूरे राष्ट्र की सांस्कृतिक अस्मिता पर सीधा हमला है। लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी ने अपने शासनकाल में धर्म, न्याय, सेवा और सामाजिक समरसता की जो मिसाल प्रस्तुत की, वह आज भी देश के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके नाम और स्मृतियों से जुड़ी विरासत को नुकसान पहुँचाना अक्षम्य अपराध है।

अखिल भारतीय पाल महासभा शाखा कानपुर नगर केंद्र एवं प्रदेश की भाजपा सरकार से यह मांग करती है कि जिन ऐतिहासिक मूर्तियों और स्थलों को क्षति पहुँचाई गई है, उन्हें शीघ्रातिशीघ्र उसी स्थान पर पूर्ण सम्मान, गरिमा और पारंपरिक स्वरूप में पुनः स्थापित किया जाए। साथ ही इस कृत्य के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व एजेंसियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

महासभा यह भी स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देती है कि यदि सरकार इस गंभीर विषय पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो पाल समाज प्रदेश एवं देशभर में व्यापक जनआंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होगी। पाल समाज अपने महापुरुषों के सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।

अखिल भारतीय पाल महासभा यह दो टूक कहना चाहती है कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी का अपमान पाल समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा। यदि सरकार ने इस विषय को अनदेखा किया, तो पाल समाज आगामी चुनावों में भाजपा को करारा सबक सिखाने का लोकतांत्रिक निर्णय लेने के लिए बाध्य होगा।

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