दयानन्द गर्ल्स कालेज में एक दिवसीय संगोष्ठी

 

दैनन्दिन जीवन में श्रीमद् भगवद् गीता का व्यावहारिक महत्त्व

 

 

श्रीमद् भगवद्गीता भारतीय संस्कृति का वह अमूल्य ग्रंथ है जो केवल एक धार्मिक ग्रंथ न होकर मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मार्गदर्शन की भूमिका निभाता है। गीता के उपदेश आत्म बल, समत्व, धैर्य और कर्तव्य निष्ठा का संदेश देते हैं। इसके सूत्र समय और परिस्थिति की सीमाओं से परे जाकर आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं , जितने महाभारत काल में थे। विद्वानों ने गीता के सिद्धांतों को मनोविज्ञान, प्रबंधन, शिक्षा , नेतृत्व ,सामाजिक समरसता अवसाद निवारण, डिजिटल युग ,पर्यावरणीय स्थिरता तथा वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में प्रस्तुत किया है। गीता केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन ही नहीं, बल्कि आधुनिक जीवन की जटिलताओं का समाधान प्रस्तुत करने वाला शाश्वत ज्ञान स्रोत है। गीता का कर्म योग निश्चित कर्तव्यपालन की प्रेरणा देता है, भक्ति योग आस्था आत्मसमर्पण और शांति की ओर ले जाता है ,ज्ञान योग तर्क और विवेक के द्वारा अज्ञान का निवारण करता है तथा ध्यान योग मन की शांति और एकाग्रता की शक्ति प्रदान करता है। इन विविध आयामों को आधुनिक संदर्भों में गीता मनीषियों द्वारा जिस गहराई से प्रस्तुत किया गया है, वह प्रशंसनीय है।

उक्त विचार श्रीमद्भगवद्गीता एवं वैदिकवांड़्मयशोधपीठ( छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर) एवं संस्कृत विभाग दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित” दैनन्दिन जीवन में श्रीमद् भगवद्गीता का व्यावहारिक महत्त्व” विषय पर आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि पूर्व अपर कमिश्नर आयकर नरेश कुमार नैब ने व्यक्त किए। विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे छत्रपति शाहूजी विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राम किशोर ने व्यवस्थित दिनचर्या एवं अभ्यास पर संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को अपनी दैनिक दिनचर्या व्यवस्थित करने के लिए भगवद्गीता में छठवें अध्याय में अभ्यास की विस्तृत चर्चा की गई है। उन्होंने न्यूरोलॉजी पैथी और भगवद् गीता के संबंध पर भी चर्चा की। अतिथिओं का स्वागत करते हुए प्राचार्या प्रो० वन्दना निगम ने गीता के महत्त्व पर प्रकाश डाला । निदेशिका प्रो० अर्चना वर्मा जी ने दैनिक जीवन में गीता को कैसे अपनाया जाए विषय पर प्रकाश डाला । विषय प्रवर्तन श्री अनिल कुमार गुप्ता विश्वविद्यालय समन्वयक ने किया। कार्यक्रम का संचालन आस्था शुक्ला ने दिया । कार्यक्रम में गीता आधारित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार तथा प्रमाण पत्र वितरित किए गए, निबन्ध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान आस्था शुक्ला तथा भाषण प्रतियोगिता में श्रेया का रहा । कार्यक्रम संयोजिका डॉo मिथलेश गंगवार थीं । धन्यवाद ज्ञापन प्रो० प्रीति वाधवानी ने किया ।कार्यक्रम में संस्कृत विभाग की वरिष्ठ प्रो० आशा रानी पाण्डेय, तथा डॉ विमला देवी और कविता विश्नोई का विशेष सहयोग रहा । कार्यक्रम में प्रो० सुगन्धा तिवारी, प्रो० अलका श्रीवास्तव, प्रो० मुकुलिका हितकारी, प्रो० सुचेता शुक्ला, प्रो० स्वाती सक्सेना, प्रो० नगीना जवीं, डॉ० साधना सिंह, प्रो० शिखा पाण्डेय, प्रो० उपासना सिंह, प्रो० सुमनसिंह, प्रो० इन्दु यादव, प्रो० रचना प्रकाश, डॉ अर्चना दीक्षित,प्रो० अंजली श्रीवास्तव, प्रो० मधुरिमा सिंह, प्रो० रूचमिता, डॉ० मंजुला श्रीवास्तव, डॉo दीपाली सक्सेना, डॉ० अंजना श्रीवास्तव सहित महाविद्यालय की अन्य विभागों की प्रवताऍं तथा गीता अनुरागी छात्राएँ उपस्थित रहीं ।

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