रमजान में तरावीह के एहतमाम और शरियाई हिदायतों पर जोर
कानपुर कुल हिन्द इस्लामिक इल्मी अकादमी के मुफ्तियों ने रमजान-उल-मुबारक के आगमन पर मुसलमानों से इस माह की कद्र और एहतराम करने की अपील की है। अकादमी ने लोगों की धार्मिक समस्याओं के समाधान के लिए ‘अल-शरिया हेल्पलाइन’ भी जारी की है।
अकादमी के अध्यक्ष मुफ्ती इकबाल अहमद कासमी और अन्य पदाधिकारियों ने अपील में कहा कि रमजान रहमतों और बरकतों का महीना है। इसकी सबसे बड़ी खासियत रोजा और तरावीह हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूरे महीने 20 रकअत तरावीह एहतमाम से पढ़ना और उसमें कुरआन सुनना सुन्नत-ए-मुतवातिरा है। केवल कुछ दिनों में कुरआन खत्म करके तरावीह छोड़ देना सुन्नत के खिलाफ है।
मुफ्तियों ने हाफिजों से विशेष अपील करते हुए कहा कि तरावीह में कुरआन को तजवीद और सही मखारिज के साथ ठहर-ठहर कर पढ़ा जाए, न कि इतनी जल्दी कि कुछ समझ में न आए। साथ ही हाफिजों से शरई लिबास और दाढ़ी रखने की सुन्नत अपनाने का भी आग्रह किया गया।
उन्होंने रमजान के आखिरी दस दिनों में शब-ए-कद्र की तलाश और एतिकाफ की सुन्नत को अहमियत देने की बात कही। साथ ही जकात और फित्रा अदा करने तथा बिना भेदभाव के गरीबों, अनाथों और विधवाओं की सेवा करने की भी अपील की।
मुफ्तियों ने सभी मुसलमानों से रमजान की गरिमा बनाए रखने और दिन में खुलेआम खाने-पीने जैसे कृत्यों से बचने का भी आग्रह किया।
