परमट प्राइमरी स्कूल नीलामी घोटाला: कोर्ट ने मांगा जवाब, पार्षद ने लगाए गंभीर आरोप
कानपुर। शहर के परमट क्षेत्र में स्थित प्राथमिक विद्यालय की कथित अवैध नीलामी का मामला अब अदालत तक पहुंच गया है। भाजपा पार्षद विकास जायसवाल की याचिका पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने प्रमुख सचिव (लोक निर्माण विभाग) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
पार्षद जायसवाल ने नीलामी प्रक्रिया को अवैध और नियमों के खिलाफ बताते हुए शिक्षा के अधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाया है। याचिका में कहा गया है कि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना ही भवन को ध्वस्त कर दिया गया, जो सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है।
सबसे बड़ा विवाद नीलामी राशि को लेकर उठा है। आरोप है कि स्कूल से निकले मलबे (ईंट, सरिया व गेट) की कीमत मात्र 5,424.30 रुपये आंकी गई, जो वास्तविक कीमत से काफी कम है। पार्षद ने इसमें मिलीभगत और अनियमितता की आशंका जताई है। उनका कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के स्कूल को गिराकर सबूत मिटाने की कोशिश की गई।
मामले ने और तूल तब पकड़ा जब अदालत में सुनवाई के दौरान ही बेसिक शिक्षा अधिकारी ने भवन ध्वस्तीकरण के आदेश फिर से जारी कर दिए। यह मुद्दा विधान परिषद में भी उठा, जहां समिति ने नोटिस जारी किया। आरोप है कि समिति के संज्ञान के महज दो दिन बाद ही तोड़फोड़ शुरू कराकर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया।
अधिवक्ता विश्वजीत और पार्षद विकास जायसवाल का कहना है कि नीलामी पूरी तरह नियमों के खिलाफ है और इसमें प्रशासनिक मिलीभगत है। उन्होंने न्यायालय से सच्चाई सामने लाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल अदालत ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, अगली सुनवाई में मामले की परतें खुलने की उम्मीद है।
