सालाना अहले बैत कॉन्फ्रेंस व जश्न रिदाए फ़ज़ीलत व क़िराअत का शानदार आयोजन
कानपुर, 15 फरवरी तरका उस माल को कहा जाता है जो किसी व्यक्ति के इंतकाल के बाद वह छोड़ जाता है। उस माल में उसकी बीवी, बच्चों और अन्य करीबी रिश्तेदारों का हक़ अल्लाह तआला ने मुक़र्रर किया है। जो इन में से किसी का हक़ मारेगा, वह अल्लाह के यहाँ जवाबदेह होगा। आज हम बड़ी आसानी से अपनी बेटियों और बहनों का हक़ मार देते हैं। इसका बहुत बड़ा खमियाज़ा हमें भुगतना पड़ रहा है और आगे भी भुगतना पड़ेगा।
इन ख़यालात का इज़हार जामिया अशराफुल बनात निस्वा गद्दियाना के जामिया ग्राउंड में ऑल इंडिया गरीब नवाज़ काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत अल्लामा मौलाना मुहम्मद हाशिम अशरफ़ी साहब, सरबराह-ए-आला जामिया हाज़ा की सरपरस्ती में आयोजित दसवीं बार सालाना अहले बैत कॉन्फ्रेंस में आलिमात व फ़ाज़िलात ने संयुक्त रूप से किया।
आलिमा फ़ाज़िला सुग़रा बीबी अशरफ़ी साहिबा, मुअल्लिमा जामिया अशरफ़ुल बनात ने कहा कि अहले बैत का मक़ाम व मरतबा निहायत ही बुलंद व बाला, अर्फ़ा व आला है।
इल्म इंसानियत का ज़ेवर है। जो इल्म हासिल नहीं करता, वह न सही तरीक़े से इबादत कर सकता है और न अल्लाह का क़ुर्ब हासिल कर सकता है। वह शैतान का खिलौना बन जाता है। इसलिए हमें चाहिए कि कम से कम फ़र्ज़ उलूम ज़रूर हासिल करें, ताकि हमारी इबादतों का हमें कमा हक़्क़हू फ़ायदा मिल सके।
मोहतरमा हिरा फ़ातिमा अशरफ़ी ने अंग्रेज़ी में तक़रीर करते हुए कहा कि हमारी तारीख़ ऐसी बाकमाल औरतों से भरी पड़ी है जिन्होंने इल्म के मैदान में क़लीदी किरदार अदा किया। उनकी ज़िंदगियाँ आज भी हमारे लिए मशअल-ए-राह हैं। यहाँ तक कि वे इल्म के ऐसे बुलंद मक़ाम पर फ़ाइज़ थीं कि कई सहाबा-ए-किराम ने उनसे इल्मी इस्तिफ़ादा किया। उन्होंने पर्दे में रहकर उम्मत की रहनुमाई का अज़ीम काम अंजाम दिया। मोहतरमा सालेहा तस्नीम सिद्दीकी साहिबा और मोहतरमा उरूज फ़ातिमा ने मेहमानों का इस्तकबाल किया।
आख़िर में सलात व सलाम के बाद हुज़ूर गाज़ी-ए-इस्लाम हज़रत अल्लामा मौलाना मुहम्मद हाशिम अशरफ़ी साहब, सरबराह-ए-आला जामिया हाज़ा ने मुल्क में अमन-ओ-अमान, खुशहाली और तरक़्क़ी के लिए दुआ फ़रमाई। इसके बाद लंगर तक़सीम किया गया। हज़ारों ख़वातीन-ए-इस्लाम मुकम्मल पर्दे के साथ जलसे में शरीक थीं!
