दिनांक 03.03.2026*

थाना – नजीराबाद, सेन्ट्रल साइबर टीम

 

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन दिलाने के नाम पर संचालित एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश

किया गया है। यह गिरोह लोगों को लोन स्वीकृत कराने का झांसा देकर उनके पैन कार्ड, आधार कार्ड एवं आवासीय विवरण प्राप्त कर लेता था। प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर उनके नाम से फर्जी फर्म/एंटरप्राइज स्थापित कर जीएसटी पंजीकरण कराया जाता था तथा बैंक खाते खोले जाते थे ।

 

प्रारंभिक जांच में अब तक 38 बोगस कंपनियों का पता चला है, जिनके माध्यम से लगभग ₹250 करोड़ का लेन-देन किया गया है। इस प्रकरण में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है तथा पांच आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

जांच के दौरान “पार्वती एंटरप्राइज” नामक फर्म एक गरीब रिक्शा चालक के नाम पर फर्जी रूप से पंजीकृत पाई गई । संबंधित व्यक्ति को इस फर्म और उसके बैंक खाते की जानकारी तक नहीं थी ।

 

उक्त खाते में लगभग ₹1.50 करोड़ की राशि फ्रीज कराई गई है। इसी प्रकार पार्वती एंटरप्राइज से जुड़ी कुल 12 अन्य फर्मों का संचालन किया जा रहा था तथा दो अन्य फर्मों के साथ भी लेन-देन किया जा रहा था ।

 

शिकायतकर्ता अनुराग वर्मा से कपिल मिश्रा द्वारा उसकी बहन की शादी के लिए लोन दिलाने के नाम पर दस्तावेज लिए गए थे । उसे लगातार डेढ़ माह तक यह कहकर टालते रहे कि लोन प्रक्रिया में है, जबकि उसके नाम से फर्म खोलकर जीएसटी पंजीकरण कराया जा चुका था और एचडीएफसी बैंक में खाता संचालित किया जा रहा था । खाते में धनराशि का आवागमन एवं निकासी की जा रही थी तथा जीएसटी चोरी से संबंधित लेन-देन किया जा रहा था ।

 

आरोपियों द्वारा फर्म पंजीकरण के दौरान ओटीपी प्राप्त करने हेतु मोबाइल फोन अपने पास रखे जाते थे । अब तक लगभग 30 मोबाइल फोन एवं 52 चाबियां बरामद की गई हैं, जिससे अनेक फर्जी फर्मों के संचालन की पुष्टि हुई है ।

शिकायतकर्ता को जब संदेह हुआ कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग हो रहा है, तब उसने पुलिस से संपर्क किया ।

प्रारंभिक स्तर पर साइबर धोखाधड़ी की आशंका के आधार पर जांच प्रारंभ की गई, किंतु विस्तृत जांच में यह एक बड़े स्तर की जीएसटी चोरी और पहचान संबंधी दस्तावेजों के दुरुपयोग का संगठित मामला सामने आया ।

प्रकरण के संबंध में जीएसटी विभाग एवं संबंधित बैंकों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। *आरोपियों के विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी एवं अन्य सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत* कर अग्रिम कार्यवाही प्रचलित है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *