ऐ अल्लाह पूरे विश्व में शांति सदभाव कायम कर, जंग बंद हो।

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कानपुर 11 मार्च पैगम्बर ए इस्लाम के दामाद, इस्लाम के चौथे खलीफा, शेरे खुदा मुश्किल कुशा हज़रत मौला अली (रजि०) की शहादत पर खानकाहे हुसैनी हज़रत ख्वाजा सैय्यद दाता हसन सालार शाह (रह०अलै०) की दरगाह पर यौम ए शहादत मनाकर खिराजे ए अकीदत पेश की गयी।

 

हज़रत ख्वाजा सैय्यद दाता हसन सालार शाह (रह० अलै०) की मज़ार पर गुलपोशी इत्र केवड़ा संदल पेश किया गया उसके बाद शोरा ए कराम ने नात मनकबत पेश की शेरे खुदा हज़रत मौला अली की शहादत पर खिराज ए अकीदत पेश करते हुए उलेमा ए दीन ने कहा कि खामोश है तो दीन की पहचान अली है अगर बोले तो लगता है कुरान अली है। हज़रत अली की विलादत 13 रजब काबा शरीफ के अंदर हुई थी मौला अली 19 रमज़ान 40 हिज़री फज़िर की नमाज़ पढ़ाने के लिए जामा मस्जिद कुफा पहुंचे मस्जिद में मुंह के बल अब्दुर्रहमान इब्ने मुलजिम नाम का शख्स सोया हुआ था उसको मौला अली ने नमाज़ के लिए जगाया और खुद नमाज़ पढ़ाने के लिए खड़े हो गए इब्ने मुल्जिम मस्जिद के एक ख़म्भे के पीछे ज़हर में डूबी तलवार लेकर छिप गया मौला अली ने नमाज़ पढ़ानी शुरु की जैसे ही सजदे के लिए मौला अली ने अपना सिर ज़मीन पर रखा, इब्ने मुलजिम ने ज़हर में डूबी हुई तलवार से अली के सिर पर वार कर दिया तलवार की धार से ज़हर जिस्म में उतर गया 21 रमज़ानुल मुबारक 40 हिजरी को शहादत हुई आपकी उम्र 63 साल थी आपकी नमाज़े जनाज़ा आपके बड़े शहज़ादे हज़रत ए इमाम हसन ने पढ़ाई।

 

खादिम खानकाहे हुसैनी इखलाक अहमद डेविड चिश्ती ने कहा कि हज़रत मौला अली कहते है कि कभी कामयाबी को दिमाग मे और नाकामी को दिल मे जगह न देना क्योंकि कामयाबी दिमाग मे तकब्बुर और नाकामी दिल मे मायूसी पैदा कर देती है, नमाज़ हमारे लिए ठीक वैसे ही है जैसे एक भूखे के लिए खाना और प्यासे के लिए पानी ज़रुरी होता नमाज़ इस्लाम के लिए ज़रुरी मानवता इस्लाम का चेहरा है। हज़रत मौला अली की जिन्दगी इंसाफ इल्म और मज़लूमों की हिमायत का बेहतरीन नमूना है और उनके बताये रास्ते पर चलने व नमाज़ की पाबंदी पर ज़ोर दिया।

 

इखलाक अहमद डेविड चिश्ती ने कहा कि हमारे भारत ने दुनियां को संघर्षो के बजाए शांति का संदेश दिया न की जंग का जंग किसी भी मसले का हल नही भारत की विचारधारा पूरी दुनियां एक परिवार है भारत की संस्कृति विभिन्न धर्मों, संप्रदायों और विचारधाराओं का सम्मान करना सिखाती है और विश्व में शांति भाईचारे समृद्धि का पैगाम देती है। हम आज रमज़ान और होली एक साथ मना रहे है दुनियां में आपसी भाईचारे दूसरे मज़हब की इज़्ज़त कैसे की जाती है पूरी दुनियां को सिखाती है।

 

खिताब के बाद नज़र मौला अली व सलातो सलाम पेशकर दुआ हुई दुआ में अल्लाह से मौला अली मुश्किल कुशा के सदके में नमाज़ की पाबंदी करने, हम सबको गरीबों मज़लूमों की मदद करने, मुल्क में खुशहाली तरक्की देने, पूरे दुनियां में अमनों अमान कारम रहने, आतंकवाद का नाश होने, आपसी भाईचारा कायम होने, पूरे विश्व मे शांति सदभाव कायम हो जंग बंद होने की दुआ हुई।

 

नज़र दुआ के बाद रोज़ा अफ्तार का एहतिमाम किया किया गया जिसमें सैकड़ों रोज़दार शामिल हुए।

 

नज़र व दुआ मे इखलाक अहमद डेविड चिश्ती, सूफी मोहम्मद हारुन निज़ामी, हाफिज़ मोहम्मद गुफरान, सूफी इशतियाक चिश्ती, मुनीर अहमद कादरी, सैय्यद अबूज़र ज़ैदी, अबरार अहमद वारसी, हाफिज़ मोहम्मद कफील, अबुल हाशिम कश्फी, परवेज़ आलम वारसी, सूफी मोईनुद्दीन चिश्ती, जमालुद्दीन फारुकी, मोहम्मद अनवार खान, मोहम्मद जावेद कादरी, मोहम्मद वसीम, डा0 निसार अहमद, इस्लाम खाँ आज़ाद, मोहम्मद फैज़ान कादरी, एज़ाज़ अहमद, अयाज़ चिश्ती, जुबैर सकलैनी, इस्लाम खान, फाजिल चिश्ती, अजीम प्रधान, मोहम्मद अज़हर, मोहम्मद तौसीफ, सलमान अंसारी, मोहम्मद दिलशाद, मोहम्मद दानिश, रहमानी रब्बानी, मोहम्मद लारैब, गुलज़ार आलम, शारिक वारसी, आज़म महमूद, मकसूद इराकी मोहम्मद रज़ा खान, मोहम्मद मुबीन, एज़ाज़ रशीद, मोहम्मद फरीद, परवेज़ सिद्दीकी, मोहम्मद शाहिद चिश्ती, मोहम्मद अनीस, मोहम्मद मुज्जिमल, अदशान सफी, शमशुद्दीन फारुकी, आसिफ खान, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद जावेद, अनवार मदारी, मोहम्मद फैज़, मोहम्मद नदीम, मोहम्मद अजीम, मोहसिन अहमद, हाशिम मंसूरी, हबीब आलम, खादिम खानकाहे हुसैनी अफज़ाल अहमद आदि लोग मौजूद थे।

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