पूरे प्रदेश में समाज कल्याण सेवा समिति लावारिश शवों का अन्तिम संस्कार करायेगी।
कानपुर, समाज कल्याण सेवा समिति द्वारा 15 मार्च, 2009 से कानपुर नगर तथा 10 जनवरी 2010 से कानपुर देहात में लावारिश शवों का ससम्मान अपने परिजनों की भांति अन्तिम संस्कार कराया जा रहा है। सत्यता यह है कि दुनियाँ में हर जन्म लेने वालों के माता-पिता-बहन-भाई तथा नाते-रिश्तेदार होते हैं किन्तु दुर्घटना आदि से अज्ञात स्थल पर मृत्यु होने तथा अपनी पहचान मिटने के कारण वह लावारिश हो जाता है तथा उसके साथ जानवरों से बदतर व्यवहार किया जाता था। उन्हें जल्लादों द्वारा नदियों में फिंकवाया जाता था। कौए कुत्तों, जंगली जानवरों द्वारा नोचते देख दिल द्रवित हो जाता था इनके भी साथ इन्सानित का व्यवहार होना चाहिए था। नदियाँ भी प्रदूषित होती थीं। कई दिनों के सड़े शव से नदी तो दूषित होती थी। साथ ही इसमें स्नान करने वाले भी अनेकों बीमारियों से ग्रसित होते थे। तब मन में आया कि न मैं हिन्दू बनूंगा न मुसलमान बनूंगा-इन्सान की औलाद हूँ इन्सान बनूंगा और दुनियां में पैदा होने वाले हर इन्सान की सेवा करूंगा। इस महामानव यज्ञ कार्य में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध पारसी और वहाई धर्म के लोगों ने इन्सानियत का परिचय देते हुए समिति का साथ दिया और अपनों की भांति लावारिश को कन्धा दिया। इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिये हमने सभी से तन-मन-धन-बांस- पन्नी-कफन चादर की अपील की यह सब नहीं तो कम से कम कन्धा दान माँगा। न कोई लावारिश पैदा हुआ न कोई लावारिश मरे। इन्सान का इन्सान का हो भाईचारा-यही संदेश हमारा।समिति के सचिव धनीराम पैंथर ने अपने उद्बोधन में बताया है कि दिनांक 14.03.2026 तक कानपुर नगर व देहात में 16700 लावारिश शवों का अन्तिम संस्कार कराया जा चुका है। यदि समाज का सहयोग एवं आशीर्वाद इसी तरह समिति को मिलता रहा तो पूरे प्रदेश में समाज कल्याण सेवा समिति लावारिश शवों का अन्तिम संस्कार करायेगी।
