हमारे देश में बहुत से ऐसे धार्मिक स्थल हैं , जो मन्नतें मानने के लिए प्रसिद्ध हैं। मध्य प्रदेश के चित्तोड़ और नीमच के पास स्थित माँ जोगणिया देवी के मन्दिर की ख्याति चोरों की मन्नतें पूरा करने वाले मन्दिर के रूप में है।
जोगणिया माता लोक आस्था की देवी हैं जिन्हें एक चमत्कारी देवी के रूप में जाना जाता है। देवी मन्दिर के प्रवेश द्वार पर दो शेरों की सजीव आकृतियाँ बनी हैं । चित्तोड़गढ़ के पहाड़ी और सौंदर्य के बीच स्थित पुराना और अद्भूत माता का मन्दिर है जो नीमच से करीब 90 कि .मी. , चित्तोडगढ़ से करीब 75 कि.मी. एवं भिलवाड़ा से करीब 80 कि.मी.दूर राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा से लगे उपरमाल पठार के दक्षिणी छोर पर जोगणिया माता का प्रसिद्ध मन्दिर स्थित है
लोकमान्यता है कि पहले यहाँ अन्नूपर्णा देवी का मन्दिर था , जिसके बाद अन्नपूर्णा के बजाय जोगणिया माता के नाम से यह शक्ति पीठ पूरे लोक में प्रसिद्ध हुआ मन्दिर परिसर में लटकी हुई हथकड़ियों के बारे में कहा जाता है कि चोर और डाकू वारदात को अंजाम देने से पहले माता का आशीर्वाद लिया करते थे ।जिनके पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद मौके से फरार होते हुए माँ के दरबार पहुँचते थे जहाँ उनके हाथों में लगी बेड़िया स्वतः ही खुल जाया करती थीं ।
यह अद्भुत चमत्कारिक मन्दिर कंजर बाहुल्य वाले बीहड़ो में स्थित है।
इस मन्दिर तक पहुँचने का रास्ता बहुत ही कठिनाई व जोखिम भरा है। इसलिए सामान्य व्यक्ति इस मन्दिर तक कम ही जा पाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार बीहड़ के चारों ओर पहाड़ियों से घिरे हुए इस मन्दिर में विराजित हैं जोगणिया देवी और काली माता। चोर-डकैत किसी भी वारदात को अंजाम देने से पहले यहाँ माता का आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं। यही नहीं , चोर-डकैत यहाँ माता की आज्ञा लेने भी आते हैं कि वारदात को अंजाम देना है कि नहीं।
इसके लिए वे माता के दोनों हाथों में एक-एक फूल चढ़ाते हैं। ऐसी मान्यता है कि अगर अनुमति वाले हाथ का फूल चोर के हाथ में गिरता है , तो वह चोरी-डकैती करने निकल जाएगा और पकड़ा भी नहीं जाएगा। यदि मनाही वाले हाथ से फूल गिरता है तो माना जाता है कि माता ऐसा करने से मना कर रहीं है और वह यह कार्यक्रम टाल देता है । चोर-डकैत देवी का आदेश पाकर ही चोरी-डकैती के लिए निकलते हैं और उससे प्राप्त धन का एक हिस्सा माता को भेंट करते हैं। मान्यता है कि ऐसा न करने वाले पर देवी क्रोधित हो जाती हैं और सजा के तौर पर उसे अपंग बना देती हैं।हालांकि , पुलिस इस मन्दिर में छापा मारकर अंजाम देने से पहले ही इन चोर-डकैतों को पकड़ सकती है , पर पुलिस भी इस अंधविश्वास को मानती है। चोरों की मन्नतें पूरे करने वाली माता का मन्दिर मानने के पीछे एक कहानी बताई जाती है । किवदंतियों के अनुसार कंजर जाति से संबंधित एक अपराधी हथकड़ी से जकड़े होने के बावजूद पुलिस हिरासत से भाग निकला।
पुलिस से बचने के लिए वह बीहड़ के रास्तों को पार करता हुआ जोगणिया माता के मन्दिर में जा पहुँचा। मन्दिर पहुँचते ही उसकी हथकड़ियाँ खुल गईं और जब पुलिसकर्मी उसे ढूँढ़ते हुए मन्दिर में पहुँचे तो वह खुली हथकड़ियाँ साँप बनकर उन्हें डसने के लिए आगे बढी । इस मंदिर के रखरखाव के लिए एक पुजारी भी नियुक्त किया गया है , जिसका खर्चा चोर-डकैतों द्वारा देवी को दिए जाने वाले हिस्से से चलता है , अपनी किस्मत सुधारने व माता को प्रसन्न करने के लिए डकैत यहाँ घंटों बैठकर माता की पूजा-आराधना करते हैं। अगर किसी चोर की पहली बार मुराद पूरी होती है , तो उसको शनिवार के दिन विशाल भंडारा करना होता और परंपरा के अनुसार देवी के मन्दिर में निर्माण कार्य तथा आने-जाने के रास्ते की मरम्मत के अलावा निकटवर्ती ग्रामीणों को मन्दिर की साफ सफाई और रखरखाव के लिए नेग स्वरूप पर्याप्त धनराशि देनी पड़ती है। यह भी सच है वहाँ के निवासी मन्दिर के लिए एक़त्रित फंड का जरा भी गोलमाल नहीं कर सकते। ऐसा करने वाले पर देवी माता का कहर टूट पड़ता है।
जौगणियां माता मन्दिर मेनाल झरने के 1KM पीछे दक्षिण में स्थिति है । मेनाल झरना राष्ट्रीय राजमार्ग पर ही पड़ता है आजकल सड़क बन गई है । इस क्षेत्र में जंगली शेर , बाघ, पैंथर जरख, बहुतायत में पाये जाते हैं
