मोबाइल की लत युवाओं के लिए खतरा, अब काबिलियत का पैमाना बनेगा डीक्यू : डीएम
सीएसजेएमयू में ‘फाइटिंग डिजिटल एडिक्शन’ कार्यक्रम, डिजिटल अनुशासन अपनाने का आह्वान
कानपुर नगर,मोबाइल और इंटरनेट का अनियंत्रित उपयोग युवाओं की एकाग्रता, मानसिक संतुलन और उत्पादकता के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित “फाइटिंग डिजिटल एडिक्शन” कार्यक्रम में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि डिजिटल युग में तकनीक का संतुलित उपयोग ही सफलता की कुंजी है और आने वाले समय में व्यक्ति की काबिलियत उसके डिजिटल व्यवहार से भी आंकी जाएगी।उन्होंने कहा कि आज का समय अटेंशन इकॉनमी का है, जहां बड़ी तकनीकी कंपनियां लोगों का ध्यान अपने प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए मनोविज्ञान और तकनीक दोनों का इस्तेमाल कर रही हैं। भारत में लगभग 97 करोड़ इंटरनेट/मोबाइल कनेक्शन होने के कारण मोबाइल फोन इस व्यवस्था का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है।उन्होंने मैकगिल विश्वविद्यालय में 1954 में हुए वैज्ञानिक प्रयोग का उल्लेख करते हुए बताया कि वैज्ञानिक जेम्स ओल्ड्स और पीटर मिल्नर ने पाया था कि मस्तिष्क में डोपामिन रिलीज होने पर चूहा भोजन और पानी छोड़कर बार-बार बटन दबाता रहा। उन्होंने कहा कि आज डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इसी सिद्धांत पर उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक जोड़े रखने का प्रयास करते हैं।उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी पी. वी. सिंधु का उदाहरण देते हुए बताया कि पुल्लेला गोपीचंद की अकादमी में खिलाड़ियों के मोबाइल फोन सुबह चार बजे जमा करा लिए जाते हैं और सप्ताह के अंत में ही वापस दिए जाते हैं, जिससे उनका पूरा ध्यान अभ्यास पर केंद्रित रहता है।कार्यक्रम में पारुल राजोरिया, डॉ. संदीप सिंह, क्लिनिकल साइकोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. प्रियंका शुक्ला, डॉ. अनमोल श्रीवास्तव, सृजन श्रीवास्तव, दुर्गा यादव, अहमद अब्दुल्ला और आशीका मिश्रा सहित अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
