कैण्टीन कर्मचारियों की भर्ती में देरी, संघ ने जताई नाराजगी

 

 

 

कानपुर– अखिल भारतीय कैण्टीन कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश के महासचिव एस.के. सिंह ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए भर्ती, प्रोमोशन और आश्रित नियुक्तियों में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने बताया कि संघ वर्ष 1997 से अध्यक्ष महेन्द्र कुमार तिवारी के साथ मिलकर कैण्टीन कर्मचारियों के हितों के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1979 में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका और 26 सितंबर 1983 के अंतरिम आदेश के बाद कर्मचारियों की स्थिति में बड़ा सुधार हुआ और उन्हें कई सरकारी सुविधाएं प्राप्त हुईं। पहले कैण्टीन कर्मचारियों को बेहद दयनीय परिस्थितियों में काम करना पड़ता था, लेकिन संघ के प्रयासों से हालात बदले। वर्तमान में विभिन्न विभागों में भर्ती प्रक्रिया बेहद धीमी है, जिससे कर्मचारियों की संख्या लगातार घट रही है। संघ ने आरोप लगाया कि कुछ विभाग, विशेषकर पोस्टल विभाग, कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर रहे हैं। आश्रित नियुक्तियों में 5 प्रतिशत कोटे के बावजूद 10 वर्षों या उससे अधिक समय लग रहा है, जिससे मृतक कर्मचारियों के परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एस.के. सिंह ने बताया कि संघ बिना किसी शुल्क के विधवा आश्रितों की मदद करता है, लेकिन पत्राचार और कानूनी प्रक्रिया में होने वाले खर्च के लिए पर्याप्त आर्थिक सहयोग नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि वे संघ को मजबूत बनाने के लिए आगे आएं, ताकि भविष्य में उनके अधिकारों की प्रभावी ढंग से रक्षा की जा सके।

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