शारदीय नवरात्र सात अक्तूबर से 14 अक्तूबर तक हैं। 15 अक्तूबर को विजयदशमी है। सुबह 11 बजे तक कलश स्थापना के कई मुहूर्त हैं। ज्योतिषाचार्य पं. केए दुबे पद्मेश ने बताया कि संकल्प के साथ पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
घर में मिट्टी की मूर्ति स्थापित करने का विधान है। इसकी जगह धातु की बनी मूर्ति भी स्थापित कर सकते हैं। मूर्ति का विसर्जन जल, भू विसर्जन या पेड़ के नीचे भी रखा जा सकता है।
सुबह 6:17 से 7:07 बजे तक पहला, 9:33 से 11:31 बजे तक दूसरा और 3:33 से 5:05 तक तीसरा मुहूर्त है। पं. पवन तिवारी ने बताया कि इस बार चतुर्थी तिथि का क्षय हो गया है। इससे नवरात्र नौ के बजाय आठ दिन के ही होंगे। अष्टमी 13 अक्तूबर को और नवमी 14 अक्तूबर को मनाई जाएगी।
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक दुर्गाजी का प्रसिद्ध पर्वकाल है, उसे शारदीय नवरात्र कहते हैं। यह पूजा परम फलदायी है। इसमें नौ दिनो तक नवरात्र व्रत किया जाता है। इस वर्ष शारदीय नवरात्र केवल आठ दिनो का ही रहेगा। यह सात अक्तूूबर बृहस्पति को प्रारंभ होगा और नवरात्र का समापन 14 अक्तूबर दिन बृहस्पतिवार को ही होगा। शुभ दिन से आरंभ होने से समस्त जनों के लिए यह बेहद शुभद माना जा रहा है।
इनकी करें पूजा
7 अक्तूबर- मां शैलपुत्री की पूजा
8 अक्तूबर- मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
9 अक्तूबर- मां चंद्रघंटा व मां कूष्मांडा की पूजा
10 अक्तूबर- मां स्कंदमाता की पूजा
11 अक्तूबर- मां कात्यायनी की पूजा
12 अक्तूबर- मां कालरात्रि की पूजा
13 अक्तूबर- मां महागौरी की पूजा
14 अक्तूबर- मां सिद्धिदात्री की पूजा
15 अक्तूबर- दशमी तिथि, विजयादशमी या दशहरा
