आजादी के 70 साल बाद सरकार का हुआ अंग्रेजों का बनाया मैकराबर्ट हास्पिटल

आजादी के 70 साल बाद सरकार का हुआ अंग्रेजों का बनाया मैकराबर्ट हास्पिटल, कानपुर प्रशासन बना मालिक

कानपुर । अंग्रेजों के शासन के समय कानपुर में सिविल लाइंस में बनवाया गया द जार्जिना मैकराबर्ट मेमोरियल हॉस्पिटल आजादी के 70 साल बाद अब यूपी सरकार का हो गया है। अभी तक इसपर ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा था लेकिन अब हॉस्पिटल की पूरी भूमि राज्य सरकार में निहित कर दी गई है।
यहां सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने के लिए भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का प्रस्ताव ट्रस्ट की ओर से डीएम को दिया गया था, जिसे शासन से मंजूरी मिल गई है। डीएम ने भूमि की एनओसी वापस लेते हुए हास्पिटल की समस्त परिसंपत्तियों को राज्य सरकार में निहित कर दिया है। करीब 32 हजार वर्गगज भूमि पर अब प्रशासन का मालिकाना हक हो गया है। कोरोना की पहली लहर में ट्रस्ट की ओर से बंद चल रहे हास्पिटल के संचालन की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन कुछ विवादों के कारण योजना आगे नहीं बढ़ी। विवाद बढ़ता गया और फिर सोसाइटी रजिस्ट्रार चिट्स एंड फंड के यहां इसकी सुनवाई हुई। कोविड हास्पिटल के संचालन की तैयारी कर रहे ट्रस्ट के गवर्नर के पक्ष में फैसला भी आया। इसके बाद गवर्नर ने सर्व सम्मति से निर्णय लिया और हास्पिटल की भूमि प्रशासन को वापस करने का प्रस्ताव भेज दिया। चूंकि यह भूमि नजूल की है ऐसे में प्रशासन को इस भूमि को लेने में कोई दिक्कत भी नहीं थी। डीएम आलोक तिवारी ने मई में मुख्य सचिव आरके तिवारी को पत्र भेजकर ट्रस्ट के गवर्नर की भावना से अवगत कराया। उन्हें बताया कि गवर्नर भी चाहते हैं कि इस भूमि पर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की स्थापना हो। अब मुख्य सचिव की ओर से इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। डीएम आलोक तिवारी ने बताया कि ट्रस्ट के गवर्नर जिनके प्रबंधन में अस्पताल की संपूर्ण परिसंपत्तियां थीं उन्होंने उसे राज्य सरकार को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया था। उसी क्रम में अब यह भूमि राज्य सरकार में निहित कर दी गई है। जो पट्टा अस्पताल संचालन के लिए दिया गया था उसे रद कर दिया गया है। अपर जिलाधिकारी नगर की अध्यक्षता में अस्पताल की संपत्ति के प्रबंधन के लिए संयुक्त रूप से तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इसमें मुख्य चिकित्साधिकारी, उप जिलाधिकारी सदर को प्रशासक के रूप में नियुक्त किया गया है। अब यह कमेटी ही सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए प्रस्ताव बनाएगी और उसे शासन को भेजा जाएगा। प्रशासन के इस फैसले का गर्वनर कमल भाटिया ने विरोध किया है और उनका कहना है मामला हाईकोर्ट में है इसलिए पट्टा रद नहीं हो सकता।

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