सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा- आंगनबाड़ी सामाजिक व्यवस्था की नींव, कोरोना से निपटने में अहम योगदान
Wed, 28 Jul 2021
कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में 75 आंगनबाड़ी केंद्रों को सुविधा संपन्न बनाने के लिए आवश्यक वस्तुओं के वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षा केंद्रों को समाज के साथ जोड़ने का सार्थक प्रयास किया गया है। आंगनबाड़ियों को गोद लेने व इन्हें सुविधा सम्पन्न बनाने की अच्छी पहल है। यह सामाजिक व्यवस्था की नींव है।
उन्होंने कहा कि गांव में जब कोरोना की स्थिति देखने हम गए तो वहां पर आंगनबाड़ियों का योगदान सबसे अहम नज़र आया। आज भी यह तीन से पांच वर्ष के बच्चों की स्क्रीनिंग करके कोरोना से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आंगनबाड़ी को प्री प्राइमरी के रूप में विकसित करने की योजना है, कोरोना के चलते योजना को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है। जल्द ही आंगनबाड़ियों का स्वरूप बदलकर उन्हें उन्हें समय की जरूरत के अनुसार विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर टीबी ग्रसित बच्चों को गोद लेकर इलाज व खान-पान की व्यवस्था करने का प्रयास सराहनीय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर में प्रदेश में संक्रमण नियंत्रित रहा। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों व कोरोना योद्धाओं को पहले टीका लगाया गया।
राज्पाल बोलीं-बच्चे हंसते हुए आएं आंगनबाड़ी केंद्र
कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा पहले आंगनबाड़ी केंद्र कागजों पर चलते थे। जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने तब उनके सामने यह बात रखी, इसके बाद यह शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कहा कि जैसा जनांदोलन गुजरात में चलाया वैसा वाराणसी के आंगनबाड़ी में भी चलाएं। इसके बाद पूरा पाठ्यक्रम बना और महिलाओं को सिखाया गया कि बच्चों को कैसे पढ़ाना है। जन्म देने वाले भले ही कोई और हों लेकिन बच्चों को सिखाने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं, इसलिए इन्हें यशोदा माता कहते हैं। आंगनबाड़ी में बच्चे रोते हुए नहीं हंसते हुए आना चाहिए। उन्हें लगना चाहिए कि वहां खेलने का मौका मिलेगा।
राज्यपाल ने कहा कि आंगनबाड़ी सबसे गरीब वर्ग के बच्चों के लिए है, दूसरी तरफ उच्च शिक्षा देने वाले कालेज हैं, अब इन दोनों को जोड़ा गया है। नैक में सोशल वर्क होना चाहिेए लेकिन बहुत से लोगों को यह मालूम ही नहीं था। इसके बाद तय हुआ कि एक विश्वविद्यालय पांच गांव और एक कालेज को एक गांव गोद लेना है। अगर ऐसा किया गया और सरकारी योजनाओं को उनतक पहुंचाया तो पांच साल में आंगनबाड़ी केंद्रों की तस्वीर बदल सकती है।
उन्होंने कहा, आंगनबाड़ी, आशा और ये सब मिलकर काम करेंगे तो गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी अस्पताल में हो सकेगी। बच्चों की पढ़ाई हो सकेगी। कालेज के प्रबंधकों से कहा कि वे आंगनबाड़ी में जरूर जाएं, परिवार को लेकर जाएं। इससे आपके बच्चों को संस्कार मिलेंगे। छात्रों को भी जाना चाहिए। वे संगीत, खेल, गणित, पेंटिंग आदि सिखाएं। सिर्फ सामग्री दे दी, इससे काम पूरा नहीं, उनके साथ बैठें, बात करें। महिलाएं किटी पार्टी चलाती हैं, तो उसके साथ आंगनबाड़ी से भी जुड़ें। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं कि यूपी ताकत नहीं, हमें अपनी ताकत और कौशल को धरती पर उतारना है। सांसद, विधायक, पार्षद सभी मिलकर चेन बनाएं तो यूपी आदर्श प्रदेश बन सकता है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए ट्रेनिंग शुरू करेंगे।
कार्यक्रम में एक्सिस इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, पीएसआईटी, कानपुर, कानपुर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, महाराणा प्रताप ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स, नारायणा विद्यापीठ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स, ऐलेन हाउस इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी तथा कानपुर इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज को आंगनबाड़ी केंद्र गोद लेने पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के बीच आंगनबाड़ियों को एजुकेशनल खिलौने, एबीसीडी, नंबर, पजेल, ब्लॉक्स, टाय फल, टाय एनीमल, एजुकेशनल मैप, प्लेबुक, पिक्टोरियल स्टोरी बुक, वाइट बोर्ड, वजन मशीन, हाईट गेज, फर्स्ट एड बॉक्स, हैण्डवास, ट्राई साईकिल, झूले, किड्स टेबल-चेयर, एवं खाने के बर्तन आदि वितरित किए। यहां पर कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल, कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक महापौर प्रमिला पांडेय, औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री नीलिमा कटियार, जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल कामल व कुलसचिव अनिल कुमार यादव समेत अन्य शिक्षक मौजूद रहे।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का काफिला सवा दस बजे हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी पहुंचा, जहां पर एडीजी भानु भास्कर समेत सभी अफसरों ने उनका स्वागत किया। राज्यपाल व कुलाधिपति एचबीटीयू में शैक्षणिक, वित्तीय, कार्ययोजना समेत 55 प्रपत्रों की आख्या पर समीक्षा की। इसके बाद वह छत्रपति शाहूजी महाराज विश्विवद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पहुंची। उनके पहुंचने के कुछ देर बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी हेलीकॉप्टर पहुंच गया, हेलीपैड पर उतरने के बाद वह सीधे विश्वविद्यालय सभागार में पहुंचे। विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स विभाग के छात्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिमा भेंट। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक के अलावा पुलिस और प्रशासनिक अफसर भी मौजूद हैं।
मा0 राज्यपाल, उ0प्र0 श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज छत्रपति शाहू जी महाराज विश्व विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कानपुर जनपद के 75 आंगनवाड़ी केन्द्रो को सुविधा सम्पन्न बनाने हेतु आवश्यक वस्तुओं के वितरण कार्यक्रम में उपस्थित आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों एवं उपस्थित लोगो को संबोधित करते हुये कहा कि 1975 से आंगनवाड़ी की कल्पना शुरु हुयी है यह लक्ष्य की आंगनवाड़ी में क्या-क्या होना चाहिये, पाठ्यक्रम, आंगनवाड़ी में महिलाओं का प्रशिक्षण कैसा हो इस संबंध में पूर्व में सोचा नही गया। उन्होनंे कहा कि जब वह 1998 मे पहली बार मंत्री बनी उसके पहले शिक्षा के क्षेत्र में 30 साल कार्य किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 में जब मा0 नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने तब 50 प्रतिशत महिलाओं व 25 प्रतिशत बच्चो के कल्याण के लिये योजना बनायी गयी और आंगनवाड़ी केन्द्रो में विभिन्न सुविधाये उपलब्ध करायी गयी तथा पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण की शुरुआत की गयी।
उन्होनंे कहा कि प्रधानमंत्री जी ने उनसे कहा कि जिस तरह उन्होंने गुजरात में जन आन्दोलन आंगनवाड़ी के लिये चलाया था ऐसा जन आन्दोलन उनके प्रदेश में भी चलायें। इसके पश्चात उन्होंने तय किया कि नई शिक्षा नीति के अनुसार आंगनवाड़ी के लिये पाठ्यक्रम बनाना होगा और उनको प्रशिक्षित करना होगा। विद्या भारती के साथ मिलकर पाठ्यक्रम बनाया और पाठ्यक्रम बनने के बाद वाराणसी में 250-300 महिलाओं का आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का अधिकारियों के साथ तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया गया। जिसमें महिलाओं को सिखाया गया कि किस तरह बच्चों को कहानी, शिक्षा, खेलकूद का पाठ्यक्रम तैयार कर सिखाया जाये। उन्होनंे कहा कि गुजरात में मैं आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को माता योशादा के रुप में देखती थी। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केन्द्रो में गरीब बच्चे आते हैं यह मैने देखा है। उन्होंने कहा कि मैने सोचा है कि बच्चे आंगनवाड़ी केन्द्रो में रोते हुये नही बल्कि हंसते हुये आना चाहिये। बच्चो को लगे कि मै आंगनवाड़ी में जाऊंगा तो मुझे पढ़ने, खेलने व भोजन में अच्छी चीजें मिलेगी। उन्हांेने कहा कि आंगनवाड़ी को समाज के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि एक विश्वविद्यालय जो डिग्रीयां देती है,पी0एच0डी0 कराती है व रोजगार देने के लिये कुछ न कुछ साधन सम्पन्न कराती है ऐसी टॉप लेबिल की विश्वविद्यालय हैं। आंगनवाड़ी सबसे गरीब वर्ग के 0 से 3 साल बच्चों को शिक्षा देती है तथा गर्भवती महिलाओं के लिये यह आंगनवाड़ी है। विश्वविद्यालय एवं आंगनवाड़ी इन दोनो को जोड़ने का प्रयास किया है। उन्होने कहा कि सोशल चेन्ज करने के लिये विश्वविद्यालयों को शिक्षा के साथ, गांव में, आंगनवाड़ी, प्राइमरी स्कूल, सेकेण्डी स्कूल के बच्चों को जोड़ना पड़ेगा तथा हमे कई तरह के अलग-अलग सामाजिक कार्य भी करना होगा।
उन्होंने उल्लेख करते हुये कहा कि एक-एक यूनिर्वसिटी पांच गांवों को गोद लें, कॉलेज एक गांव को गोद लें। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 58 हजार गांव है तथा यूनिवर्सिटी,कॉलेज, प्राइवेट कॉलेज सब मिलाकर 60 हजार हैं। एक यूनिवर्सिटी एक-एक गावं को गोद लेकर और पांच साल तक केन्द्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं को सही रुप में अमल में लाये तो पांच साल में उत्तर प्रदेश की सूरत बदल सकती है। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केन्द्र आबादी के अनुसार बनाये जाते हैं, आशा,आंगनवाड़ी मिलकर कुपोषित बच्चों,टी0वी0 के बच्चों, गर्भवती महिलाओं की बेहतर देखभाल व स्वास्थ लाभ प्राप्त होगा। सभी गर्भवती महिलाओं की डिलेवरी सरकारी अस्पताल में कराने की व्यवस्था हो सकती है। किसी भी देश में गर्भवती महिलाओं को उचित देखभाल,भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं हेतु 05 हजार रुपये नही दिया जाता है, यह सिर्फ इस देश की केन्द्र व प्रदेश सरकार गर्भवती महिलाओं को 05 हजार दे रही है। परिवार को इस दिशा हेतु जागरुक करना है कि वह इन योजनाओं का बेहतर तरीके से लाभ उठायें। उन्होंने कहा कि आगामी 15 अगस्त के बाद आंगनवाड़ी कार्यकत्री के रुप में कार्य करने वाली माता योशादा के लिये प्रशिक्षण की शुरुआत की जायेगी ताकि वह प्रशिक्षित होकर बच्चों को और अधिक संस्कारवान व शिक्षित कर सकें।
उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केन्द्रो में परिवार के साथ जाकर वहां के वातावरण को देखें और बच्चों से प्रेम से मिलकर वार्ता करें जिससे उन बच्चों में एक साकारात्मक संदेश जायेगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन लाना है तो सबको मिलकर कार्य करना होगा। अपने प्रदेश के कौशल व ताकत को आगे ले जाने में मदद करें तथा आंगनवाड़ी केन्द्रो को गोद लेकर सामाजिक परिवर्तन लाने का कार्य करें। उन्होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर के बचाव हेतु सरकार एक महीने से तैयारी का कार्य कर रही है इसमें सभी मिलकर सहयोग करें। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को मॉडल राज्य बनाना है, समस्त जनप्रतिनिधिगण, पार्षद, प्रधान और विश्वविद्यालय मिलकर मॉडल प्रदेश बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करें। इस अवसर पर मा0राज्यपाल महोदया एवं मा0मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों प्राची,गीता शुक्ला, गरिमा यादव, त्रिपाशा दिक्षित, मधु मिश्रा, तारा देवी, बीना देवी, रेखा गौतम, रेखा वर्मा आदि को आंगनवाड़ी केन्द्रो सुविधा सम्पन्न बनाने हेतु आवश्यक वस्तुओं के किट का वितरण किया जिसमें झूले, किताबे, बाक्स,टॉयबाल,ट्राईसाइकिल,खाने के बर्तन आदि सामाग्री सम्मिलित थी। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के सहयोगी कॉलेजो,एक्सेस कॉलेज,पी0एस0आई0टी0, एलेन हाउस, महाराणा प्रताप, नारायणा आदि संस्थाओं के प्रतिनिधियों को आंगनवाड़ी सहभागिता प्रशस्ति पत्र वितरित किया।
मा0 मुख्यमंत्री, उ0प्र0, श्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनवाड़ी केन्द्रो को सुविधा सम्पन्न बनाने हेतु आयोजित कार्यक्रम में संबोधित करते हुये कहा कि राज्यपाल महोदया ने अभिनव पहल करके आंगनवाड़ी केन्द्रो को समाज के साथ जोड़ने का सार्थक प्रयास किया है। उन्होनंे इस कार्य हेतु सहयोगी संस्थाओं को धन्यवाद देते हुये आंगनवाड़ी केन्द्रो को गोद लेने व उन्हे सुविधा सम्पन्न बनाने के लिये बिना किसी शासन के सहयोग के समाज में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सके और जवाबदेही के साथ अपने आप को जोड़ सके इस उद्देश्य से पहल हुई है, यह बहुत अभिनंदनीय पहल की गयी है। आंगनवाड़ी सामाजिक व्यवस्था की नीव है। उन्होनंे कहा कि कोरोना काल में आंगनवाड़ियों ने निगरानी समितियों के माध्यम से बहुत ही अच्छा कार्य किया है। उन्होनंे कहा कि देश की आबादी का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश है और अगर हम देखें तो 24 से 25 करोड़ की आबादी के बारे में कोरोना महामारी के दौरान हर व्यक्ति ससंकित था। इस सदी की सबसे बड़ी महामारी में आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में पूरा देश मजबूती के साथ पूरी प्रतिबद्धता के साथ इस लड़ाई को लड़ को लड़ रहा है। दुनिया के अंदर भारत में मृत्यु दर को और पॉजिटीविटी दर को भी नियंत्रित करने में काफी बड़ी सफलता प्राप्त की।
उन्होंने कहा कि 22 मार्च 2020 को जनता कफर््यू का आव्हॉन मा0 प्रधानमंत्री जी ने किया था। जनता कफर््यू के समापन के साथ ही मेरे पास आदरणीय राष्ट्रपति जी का और आदरणीय उपराष्ट्रपति जी का फोन आया कि कोरोना भारत में आ गया इस बड़े प्रदेश को कैसे बचाएंगे। उन्होंने आश्वस्त करते हुये कहा कि आप सभी लोग जो मार्ग दर्शन करेंगे उत्तर प्रदेश किसी भी दशा में कोरोना नियत्रंण में बेहतर परिणाम देगा। प्रथम लहर में तमाम चुनौतियों के बाद भी सफलतापूर्वक अच्छा प्रयास किया व अच्छा परिणाम दिया। लेकिन जब अप्रैल 2021 में दूसरी लहर आई कोई उपचार दुनिया के पास नहीं था, केवल वैक्सीनेशन ही बचाव का एक उपाय है। 16 जनवरी 2021 से देश के अन्दर वैक्सीनेशन का वृहद अभियान प्रारंभ हुआ। मा0 प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शिता थी कि पहले चरण में हेल्थ वर्कर्स को पूरी तरह वैक्सीनेट कर दिया गया। हेल्थ वर्कर्स के बाद कोरोना वैरियर्स को प्रथम चरण में वैक्सीनेट कराया गया। उन्होंने कहा कि ऑगनवाड़ी, आशा बहने व हमारे जनप्रतिनिधिगण, सांसदगण, विधायकगण के मार्गदर्शन में ग्राम प्रधान, पार्षद इन सभी के नेतृत्व में मिलकर काम किया और मैंने स्वयं जनपदों में, शहर व गांव में भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया। मुझे हर जगह कोई मिले या ना मिले लेकिन आंगनवाड़ी और आशा बहने जरूर मिली हैं, और घर-घर में स्क्रीनिंग का कार्य करती दिखीं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोरोना मेडिसिन किट पहले ही देने का कार्य प्रारंभ किया गया, जिससे प्रदेश के इस मॉडल को डब्ल्यूएचओ व नीति आयोग ने और दुनिया के कई संस्थानों ने भी इसकी सराहना करते हुए स्वीकारा। इसके साथ ही अन्य राज्यों और देशों से भी कहा कि उत्तर प्रदेश में कोरोना के लिए प्रोवैक्टिव होकर जो कार्य किया है, उसी तर्ज पर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी व आशा बहनें थर्ड लहर से बचने के लिए घर-घर जाकर स्क्रीनिंग का कार्य कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने विश्वशनीयता के साथ स्वंय का बचाव करते हुये अपने कार्यो को किया है। 3 से 5 साल तक के बच्चे आंगनवाड़ी केन्द्रो में जाते हैं, इन बच्चों का वह समय है जिनको जिस दिशा में ले जाओगे आगे का जीवन उसी रूप में बढ़ता हुआ दिखाई देगा। प्रदेश सरकार ने अपने हर स्तर पर सरकारी व्यवस्था के तहत तैयारी की है कि आंगनवाड़ी केंद्र अच्छा हो, ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्र बेसिक शिक्षा स्कूल परिसर के अंदर ही हैं और बेसिक शिक्षा स्कूल को ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से एक नया स्वरूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे पास बहुत ही संख्या में ऐसे आंगनवाड़ी केंद्र थे, जो किराए के भवन पर चल रहे थे, तब उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया कि आंगनवाड़ी केंद्र खुद के भवन में और सुरक्षित स्थान पर होना चाहिए जहां पर गांव, मोहल्ले के बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि वाराणसी का सेवा प्री मॉडल की आज देश के अंदर सराहना की जा रही है। उन्होंने कहा कि आज आंगनवाड़ी केंद्र के साथ छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के साथ मिलकर, एक साथ जोड़ कर आगे बढ़कर जो कार्य हो रहा है यह बहुत ही अभिनंदनीय पहल है और जिन्होंने प्रबंधक और प्रधानाचार्य जो इस विश्वविद्यालय से सम्बद्व है जो इस व्यवस्था के साथ जोड़ करके जो आंगनवाड़ी केंद्रों को गोद लेकर सुंदरीकरण कार्य करके सुविधा संपन्न बनाने का कार्य किया, यह अभिनंदनीय पहल है। समाज स्वयं आगे होकर कोई कार्य करता है तो वह आंदोलन बन जाता है और सफल होता है। इस कार्य में टी0वी0 मुक्त बहुत सारे बच्चे हुये हैं। समाज को जोड़कर आगे बड़ने की यह अच्छी पहल है। आंगनवाड़ी समाज की चिन्ता कर रही हैं तो सरकार की भी उनके हितों की चिन्ता करेगी।
इस अवसर पर औद्योगिक विकास मंत्री श्री सतीश महाना, महापौर श्रीमती प्रमिला पाण्डेय, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती नीलिमा कटियार, अपर मुख्य सचिव श्री राज्यपाल श्री महेश कुमार गुप्ता,कुलपति छत्रपति शाहू महाराज विश्वविद्यालय श्री विनय कुमार पाठक, मा0 विधायकगण एवं विधान परिषद के सदस्यगण तथा मण्डलायुक्त डा0 राजशेखर, पुलिस आयुक्त श्री असीम अरुण,जिलाधिकारी श्री आलोक तिवारी, विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व प्रशासन के अधिकारीगण, जनप्रतिनिधि व आंगनवाड़ी कार्यकत्री एवं अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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