कानपुर। नवाबगंज में रहने वाले जनरल मर्चेंट व्यापारी गुरुवार की सुबह उस समय सन्न रह गए, जब पत्नी को बेटे के लहूलुहान शव के पास बैठे देखा। बेटे की कनपटी से खून निकल रहा था और पास में ही तमंचा भी पड़ा था। रात में घर आए बेटे ने खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली थी लेकिन वह किसी पटाखे के आवाज मानकर दोबारा सो गए थे। सुबह बेटे की मौत पर वह अवाक थे और घर में कोहराम मचा था। पुलिस ने घटना की पड़ताल शुरू की है, प्राथमिक छानबीन में युवक के अवसाद में होने की बात सामने आई है। फिलहाल फोरेंसिक टीम को बुलाकर जांच कराई जा रही है और तमंचा कब्जे में लिया गया है।
नवाबगंज सब्जी मंडी में महेश गुप्ता की जनरल मर्चेंट की दुकान है और वहीं घर में परिवार के साथ रहते हैं। दो पुत्रियों आरती और पूजा की शादी कर चुके हैं और घर में पत्नी उमा, बड़े बेटे चंदन आैर बहू कोमल के साथ रह रहे हैं। पत्नी उमा मानसिक बीमार रहती हैं। छोटो बेटा 30 वर्षीय आशीष बड़ी बहन आरती और बहनोई संजय गुप्ता के पास रहकर लखनऊ के ठाकुरगंज में कपड़े का कारोबार संभालता था। एक सप्ताह पहले रक्षाबंधन पर वह लखनऊ से कार से घर आया था। बहनें आरती व पूजा राखी बांधकर सोमवार को ससुराल लौट गई थीं। आशीष को भी एक-दो दिन में लखनऊ जाना था।
पिता महेश ने बताया कि बुधवार देर रात तक बेटा आशीष घर नहीं लौटा। पूरा परिवार खाना खाकर सो गया था। रात में किसी समय आशीष आया और घर के बाहर पड़े तख्त पर बैठकर कनपटी पर तमंचे से गोली मारकर खुदकुशी कर ली। आवाज सुनी थी लेकिन कहीं किसी ने पटाखा फोड़ने की बात सोचकर वह सो गए थे। सुबह करीब सात बजे पत्नी के लिए चाय बनाकर ग्राउंड फ्लोर पर गए तो कमरे में उमा नहीं मिलीं। इसपर वह बाहर गए तो देखा कि बेटे आशीष का रक्तरंजित शव तख्त पर पड़ा था और पास में पत्नी उमा भी बैठी थीं।
घर में मोहल्ले के लोग आ गए और कुछ देर में पुलिस भी पहुंच गई। फोरेंसिक जांच में आत्महत्या किए जाने की ही पुष्टि हुई है। थाना प्रभारी देवेंद्र दुबे ने बताया कि मौके से 315 बोर का तमंचा व युवक का मोबाइल फोन कब्जे में लिया गया है। स्वजन ने आत्महत्या का कोई कारण नहीं बताया है और कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। फिलहाल घटना की जांच करके आत्महत्या के कारण का पता लगाया जा रहा है।
