कानपुर
कारोबारियों से करोड़ों की खरीद-बिक्री केवल कागजों पर मिली, करोड़ों की कर चोरी की आशंका
रिमझिम इस्पात समूह के सभी ठिकानों पर लगातार जांच-पड़ताल जारी है। टीम ओड़िशा में किए गए निवेश और कंपनी खरीद की प्रक्रिया को भी देख रही है।देश की दिग्गज इस्पात और स्टेनलेस स्टील निर्माता कंपनी रिमझिम इस्पात समूह के प्रतिष्ठानों पर चल रही आयकर की जांच जारी रही। कानपुर के अलावा अलग-अलग शहरों के स्क्रैप कारोबारियों से करोड़ों की खरीद-बिक्री की जानकारी अफसरों को मिली है, जो केवल कच्चे पर्चों पर ही सीमित थी।
वहीं, कंपनी से जुड़े बड़े डीलर भूमिगत हो गए हैं। इनके जरिये 100 से 150 करोड़ का कारोबार हर महीने होता था। ओड़िशा में किए गए निवेश और कंपनी खरीद की प्रक्रिया को भी टीमें देख रही हैं। शुरूआती जांच में जो दस्तावेज टीमों के हाथ लगे हैं वो बड़ी कर चोरी की ओर इशारा कर रहे हैं। आयकर विभाग के 250 से ज्यादा अफसरों की अलग-अलग टीमों ने गुरुवार को कंपनी के मालिक योगेश अग्रवाल के कानपुर स्थित आवास, कॉरपोरेट कार्यालय उन्नाव, हमीरपुर की फैक्टरियों पर कार्रवाई की गई थी। इसके अलावा कंपनी से जुड़े डीलरों के उप्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, हैदराबाद, कर्नाटक, हरियाणा, ओडिशा के 25 से ज्यादा प्रतिष्ठानों पर छापा मारा था। कानपुर में अलग-अलग 25 स्थानों पर जांच चल रही है।
सूत्रों ने बताया कि समूह ने ओडिशा में बड़ा निवेश किया है। निवेश के धन और इसके स्रोत की जानकारी जुटाई जा रही है। कानपुर के साथ ही उप्र के अलग-अलग शहरों में स्क्रैप का कारोबार करने वाले से बड़े स्तर पर लेन देन मिला है। शहर के जिस मेटल कारोबारी के प्रतिष्ठान पर जांच चल रही है। उसका टर्नओवर 10- 20 करोड़ के करीब है। जबकि दुकान गली में स्थित है। ऐसे में स्क्रैप कारोबारियों के जरिए बिना बिल के करोड़ों के कारोबार की जानकारी अफसरों को मिली है। वहीं योगेश अग्रवाल के तिलकनगर स्थित आवास से नकदी मिली। अलग-अलग बैंकों के 10 लॉकर मिले हैं। जिन्हें सील किया गया है। बताया गया कि इन्हें जल्द खोला जाएगा। सोने-चांदी, हीरे के गहनों का मूल्यांकन कराया जा रहा है। इसके बाद ही अनुमानित रकम का खुलासा हो सकेगा।सूत्रों के मुताबिक एक बोगस कंपनी में लगातार हो रहे लेनदेन से समूह आयकर अधिकारियों के रडार पर आया गया। लगातार 6-7 महीने से भी अधिक समय से विभाग समूह और दूसरे कंपनियाें में होने वाले लेन-देन पर नजर रख रहा था। बोगस फर्मों में मोटी रकम लगाने की जानकारी मिल रही थी। विभाग के अधिकारी सबूत तैयार करते रहे। समय के साथ-साथ अधिकारियों को और बोगस फर्मों का पता चला। विभाग को 15 बोस फर्मों की जानकारी मिल चुकी हैं। विभाग छापे से पहले इन फर्मों के कार्यालय और अन्य पतों पर पड़ताल करता रहा लेकिन यह फर्में केवल कागजातों पर काम कर रही थी। सूत्रों के मुताबिक यह बोगस फर्में थी। जो दिल्ली, कोलकाता और हैदराबाद के पतों पर पंजीकृत हैं। इनके जरिए करोड़ों का लेन-देन लगातार किया जा रहा था।
