*परली वैद्यनाथ ज्यौतिर्लिंग महाराष्ट्र*
देश में तीन वैद्यनाथ मन्दिर हैं। पहला देवघर ( झारखंड ) में दूसरा परली महाराष्ट्र में और तीसरा हिमाचल प्रदेश में है। भक्त तीनों ही जगह को ज्योतिर्लिंग मानते हैं।
विद्वानों का वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में मतभेद है कि बैजनाथ ज्यौतिर्लिंग देवघर झारखण्ड में है , अगर कन्याकुमारी से उज्जैन के मध्य रेखा खिंची जाए तो वह परली महाराष्ट्र पर दिखाई देती है और इसे ही ज्योतिर्लिंग मानते हैं ; किन्तु हम भोले के भक्त हैं ; हमें इन मतभेदों से कोई लेनादेना नहीं है हमें हर ज्योतिर्लिंग में श्रद्धा रखना है।
ऐसा कहा जाता हैं कि सत्यवान सावित्री यही (परली वैद्यनाथ में ) रहते थे । सावित्री ने यमराज से अपने पति के प्राण वापस लेने की प्रतिज्ञा यहाँ उन्होंने नारायण पर्वत पर परली में ही की थी। परली कभी मद
साम्राज्य का हिस्सा था , जिसके राजा सावित्री के पिता थे। सावित्री ने अपने पति सत्यवान को परली वैद्यनाथ में ही पुनः प्राप्त किया था ।
समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु ने , अमृत कलश और धनवन्तरीजी को राक्षसों से बचाने के लिए यहाँ स्थित वैद्यनाथ शिवलिंग में छुपा दिया था , राक्षसों को जब यह बात मालूम हो गई तो उन्होंने शिवलिंग में छुपे अमृत कलश को लेने की कोशिश की तभी शिवलिंग में से एक तीव्र ज्वाला निकली और अमृत कलश राक्षसों से सुरक्षित बच गया l मार्कंण्डेय ऋषि को जीवनदान भी यही मिला था ।
वैद्यनाथ का शिवलिंग महाभारत के काल का है। रानी अहिल्याबाई ने सन् 1700 में इसका जीर्णोद्धार करवाया था। औंधा नागनाथ ज्योतिर्लिंगसे 120 कि.मी. , परभणी से 68 कि.मी. और गंगाखेड से मात्र 31 कि.मी. पर परली वैद्यनाथ धाम है lपरली वैद्यनाथ धाम द्वारा संचालित यात्री भक्त निवास , मन्दिर की सीढ़ियों से लगा हुआ है जो अच्छा है, यात्री मामूली शुल्क पर यहाँ ठहर सकते हैं । इसमें गर्म ठंडे पानी की व्यवस्था रहती है। मन्दिर सुबह 5:00 बजे खुलता है तत्पश्चात अभिषेक एवं दर्शन शुरू हो जाता है ।
अभिषेक के लिए काउंटर पर टिकट निकलवानी होती है जो कि आपके पंडित आपके लिए करेंगे। वैद्यनाथ यानी स्वास्थ्य का देवता है जो कि आरोग्य देते हैं ,शरीर की , परिवार की व्याधियों को हरते हैं , मन्दिर में ही अन्य 11 ज्योतिर्लिंगों के मन्दिर भी है ।मन्दिर का प्रवेश द्वार पूर्व दिशा में तथा निकास उत्तर द्वार पर है।यहाँ शनि देव तथा नारदजी का एकमात्र मन्दिर है। गर्भ ग्रह के बाहर गणेशजी विराजते हैं तथा पार्वती माताजी भी विराजी हुई है ।
मन्दिर के चारों दिशाओं में चार दीपक जलते रहते हैं तथा सभागृह के सामने तीन पीतल के नंदी महाराज हैं। गर्भ ग्रह मध्यम आकार का है , कुल 4 – 5 व्यक्ति ही एक समय में अभिषेक कर सकते हैं। मन्दिर रात 9:30 पर बंद होता है । परली वैद्यनाथ परिसर के समस्त मन्दिरों के दर्शन करना चाहिए ‘ पूजा-अर्चना करना चाहिए। हमें सबसे पहला रुद्राभिषेक करवाना
चाहिए जिसका अधिक महत्व है ; प्रथम रुद्राभिषेक अच्छा शुभ फल प्रदान करता है। मन्दिर तक पहुॅंचने के लिए करीबन 50 सीढ़ियाँ चढ़नी होती है । मन्दिर मुख्य शहर से करीब 2 कि.मी. दूर है l परली वैद्यनाथ धाम रेलवे स्टेशन भी है।
