‘ब्रह्मांड में 5 नहीं, 6 तत्व हैं…’ कानपुर के बुजुर्ग का अनोखा दावा

डीयू की छात्राएं करेंगी रिसर्च

हरिकांत बाजपेई ने किया अनोखा दावा

हम सबको पता है कि इस पूरी दुनिया और इंसान को बनाने में ब्रह्मांड के अंदर पांच तत्व मौजूद हैं, जिसके मिलने पर इंसान और बाकी सब बनता है. यह पांच तत्व हैं पृथ्वी, आकाश, जल, वायु, अग्नि, लेकिन अब कानपुर के बुजुर्ग ने एक नया दावा किया है कि ब्रह्माण्ड में पांच नहीं बल्कि 6 तत्व मौजूद हैं. उनके अनुसार छठवां तत्व है काल यानी समय.
उनका दावा है कि बिना इस छठवें तत्व के बाकी तत्व काम नहीं कर सकते. उन्होंने जनता दरबार में अर्जी लगाकर यह मांग की है कि, इस बारे में प्रोफेसर्स स्तर से उनकी परीक्षा ली जाए. अब उनके दावे के बारे में दिल्ली यूनिवर्सिटी की दो प्रशिक्षु रिसर्च कर रही हैं. कानपुर के कल्याणपुर निवासी हरिकांत बाजपेई पुलिस विभाग से रिटायर हो चुके हैं. उन्होंने एक किताब लिखी है जिसका नाम है ‘छठवें तत्व की खोज’.
इस किताब में उन्होंने दावा किया है कि ब्रह्मांड में पांच नहीं बल्कि छह तत्व हैं और यह तत्व है काल यानी समय. उन्होंने बताया कि मैंने सेवानिवृत्त होने के बाद रामायण, रामचरित मानस, श्रीमद् भागवत और उपनिषदों आदि का गहन अध्ययन किया और पाया कि हमारे विद्वान ऋषि, मुनि आदि ईश्वर को जानते थे और उन्होंने यथा स्थान उनका वर्णन भी किया है. साथ ही यह भी बताया है कि ईश्वर किसे कहते हैं.

उनके अनुसार, ईश्वर मनुष्य या प्राणी न होकर एक तत्व है, जिससे सृष्टि व प्रलय प्रकाशित होते हैंं. वही परब्रम्हा है और वो ही आश्रय है. अर्थात उसके बिना कोई कार्य किया जाना सम्भव नहीं है और वह तत्व ‘काल’ है. अर्थात समय जो प्राणियों में आत्मा रूप से स्थित है तथा वाह्रय जगत में ‘काल’ समय के रूप में व्याप्त है. इस सम्बन्ध में उन्होंने 12-13 साल गहन अध्ययन-चिन्तन कर ‘काल’ ही परमात्मा है ये सिद्ध किया है. साक्ष्य जुटाये हैं और एक पुस्तक लिखी है ‘छठे तत्व की खोज’. इस विषय को कुछ साल पहले जेएनयू दिल्ली में प्रस्तुत किया था.उन्होंने बताया कि उपरोक्त पांच तत्वों से मिलकर शरीरों की रचना हुई है. किन्तु यह पांचों तत्व स्वयं नहीं मिल सकते. इन पांचों तत्वों को मिलाने वाला एक और तत्व है, जो प्रकृति से भिन्न है. वही ‘छठा तत्व’ है. रामायण के सुन्दरकाण्ड में जब श्रीराम ने समुद्र से रास्ता मांगा तो उनसे कहा गया कि गगन, समीर, अनल, जल, धरनी इन्ह कर नाथ सहज जड़ करनी. तव प्रेरित माया उपजाये सृष्टि हेतु सद ग्रथन गाये.उपरोक्त चौपाई में स्पष्ट कहा गया है कि यह पांचों तत्व जड़ हैं. अर्थात ये तत्व स्वयं मिलन नहीं कर सकते और समुद्र भी जल है. अतः वह स्वयं आपको ‘रास्ता’ नहीं दे सकता. आगे यह भी कहा गया कि ‘तव प्रेरित माया उपजाये’ अर्थात माया (प्रकृति) ने आपकी प्रेरणा से इन पांचों तत्वों को सृष्टि कार्य हेतु उत्पन्न किया है. अब हरिकांत बाजपेई ने जनता दरबार में अर्जी देकर अनुरोध किया है कि इस सम्बन्ध में प्रोफेसर्स स्तर से उनकी परीक्षा लेकर सत्यता का आंकलन प्रतिशत में किया जाए. इस सम्बन्ध में कोई शुल्क हो तो वो देने को तैयार हैं।उनके दावे पर दिल्ली यूनिवर्सिटी की दो प्रशिक्षु स्टूडेंट्स ने रिसर्च करनी शुरू कर दी है. दिल्ली यूनिवर्सिटी की पॉलिटिकल साइंस स्टूडेंट्स अलौकिका सिंह और कनिका कानपुर प्रशासन के साथ इंटर्नशिप कर रही हैं. उन्होंने अब हरिकांत बाजपेई के दावे पर रिसर्च शुरू कर दी है. उनके पूछने पर हरिकांत बाजपेई ने बताया कि जैसे पानी को उबालने के लिए अग्नि पर चढ़ाया जाता है, तो पानी तुरंत उबालना शुरू नहीं होता.उसको उबलने में थोड़ा समय लगता है और यही छठवां तत्व समय है. उनका कहना है कि इस अनूठी खोज को मैं देश को और वैज्ञानिकों को समर्पित करना चाहता हूं.

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