भगवान ने गिरिराज गोवर्धन भगवान की पूजा प्रारंभ करवाया और इन्द्र की पूजा बंद करवा दी जिससे कुपित होकर इन्द्र ने ब्रज मंडल में मूसलाधार बारिश की किन्तु ब्रज में किसी का बाल बांका भी नहीं हुआ भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर धारण कर सबकी रक्षा की और गिरिधारी कहलाए

भगवान ने कंस का वध करके अपने नाना उग्रसेन को राजगद्दी पर बिठाया भगवान का यज्ञोपवीत संस्कार हुआ प्रभु गुरु शिष्य परंपरा का पालन करने के लिए सांदिपनी मुनि के यहां गए और 64 दिन में 64 कलाओं का ज्ञान प्राप्त किया और गुरु दक्षिणा में उनके मृत पुत्र को लाकर प्रदान किया

भगवान ने गोपिकाओ को समझाने के लिए अपने मित्र उद्धव जी को भेजा जो परम ज्ञानी थे लेकिन गोपिकाओ के प्रेम के आगे उनका ज्ञान उन्हें गूदडी के समान लगा जिस स्थान पर उन्होंने अपने ज्ञान का त्याग किया वह स्थान ज्ञान गूदडी के नाम से प्रसिद्ध हो गया

 

भगवान ने जरासंध का वध कर दिया और समुद्र के बीच में द्वारिका पुरी बसाई और द्वारिकाधीश कहलाए मैया रुक्मिणी के निवेदन पर भगवान ने महाराज भीषमक की नगरी में पहुंच कर देवी मंदिर से उनका हरण किया और द्वारिका पुरी ले गए जहां उनका विवाह हुआ सम्पन्न हुआ इस अवसर पर समस्त भक्तों ने भगवान के विवाह महोत्सव का आनन्द लिया

 

श्री राम सेवा समिति के तत्वावधान में मालवीय पार्क हरबंस मोहाल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठम दिवस पर समिति के अध्यक्ष मनोज बाजपेई एवं कानपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष श्री सरस बाजपेई द्वारा पोथी पूजन और वृन्दावन धाम से पधारे पंडित दीपक कृष्ण जी महाराज का पूजन कर कथा प्रारम्भ कराई गई

 

इस अवसर पर अमिताभ बाजपेई विधायक, सुनील बजाज, प्रदीप गुप्ता, कृपा शंकर त्रिवेदी, राजेश सिंह, रानी दीक्षित, निशा बाजपेई, रेनू तिवारी, गरिमा दीक्षित, मीरा बाजपेई, मयंक गुप्ता, विपिन दीक्षित आदि सैकड़ों भक्त उपस्थित हुए

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