बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र ने फंदा लगाकर जान दी, बंद कमरे से आ रही थी बदबू
आइआइटी कानपुर में छात्रावास के अंदर बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र धीरज सैनी ने फंदा लगाकर जान दे दी। शव कमरे में पंखे से लटकता मिला। कमरे के पास से गुजरने के दौरान दुर्गंध आने पर घटना की जानकारी हुई।
पुलिस के अनुसार, 28 सितंबर से कमरे का दरवाजा बंद था। धीरज 123 नंबर कमरे में अकेला ही रहता था। सहपाठियों को भी दिखाई नहीं दिया था। वह हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के बिचौली रोड ककरकई का रहने वाला था। पिता सतीश को जानकारी दी गई है।
थाना प्रभारी कल्याणपुर अजय प्रकाश मिश्रा ने बताया कि दुर्गंध आने पर IIT प्रशासन ने जानकारी दी, तब दरवाजा तोड़ा गया।कानपुर में स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में सॉफ्टवेयर डेवलपर के पद पर कार्यरत दीपक चौधरी ने अपने फ्लैट में फंदा लगा आत्महत्या कर ली थी। वे महाराष्ट्र के जलगांव के रहने वाले थे। गुबा गार्डन के विजय एन्क्लेव अपार्टमेंट में रहकर आइआइटी में नौकरी कर रहे थे। दीपक ने मराठी भाषा में लिखे सुसाइड नोट में अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि मैं खुद को फेलियर महसूस करता हूं। इस नोट से उनके गहरे मानसिक तनाव का।
दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी, आईआईटी दिल्ली एमएससी से करने के बाद आईआईटी कानपुर में केमिस्ट्री से पीएचडी में दाखिला लेने के बाद अंकित ने जान दे दी थी। यूजीसी की 37 हजार रुपये महीने की फेलोशिप मिलने के बावजूद मेधावी अंकित यादव के इस कदम से हर कोई स्तब्ध था। उसका शव छात्रावास के कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था।
