आज दिनांक 7 नवम्बर 2025 दिन शुक्रवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, कानपुर शाखा द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन IMA कॉन्फ्रेंस हॉल, “Temple of Service”, 37/7, परेड, कानपुर में किया गया।
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस आगामी सीएमई कार्यक्रम “थोरेकोविज़न-2025”: थोराकोस्कोपी कार्यशाला एवं सीएमई के संदर्भ में आयोजित की गई, जो कि National College of Chest Physicians U.P., Dr. Kativar Chest Centre Pvt. Ltd. एवं Indian Medical Association, Kanpur के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार, 8 नवम्बर 2025 को आईएमए ऑडिटोरियम परेड कानपुर में आयोजित किया जाएगा।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, अध्यक्ष, IMA कानपुर, डॉ. एस. के. कटियार, आयोजन अध्यक्ष, डॉ. शालिनी मोहन, सचिव, IMA कानपुर, डॉ. संदीप कटियार, आयोजन सचिव, डॉ. विशाल सिंह, वित्त सचिव (IMA), डॉ. दीपक श्रीवास्तव, वैज्ञानिक सचिव (IMA) एवं डॉ. कुश पाठक, सह-वैज्ञानिक सचिव (IMA) ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।
आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, ने आए हुए पत्रकार बंधुओं का स्वागत करते हुए बताया कि एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक कार्यक्रम ‘थोरेकोविज़न-2025’ का आयोजन 8 नवम्बर 2025 को आईएमए भवन, कानपुर में किया जाएगा। यह कार्यक्रम नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिज़ीशियन्स (इंडिया) तथा कटियार, चेस्ट सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, कानपुर शाखा के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में देशभर के प्रमुख पल्मोनोलॉजिस्ट, स्नातकोत्तर छात्र एवं मेडिकल फैकल्टी सदस्य भाग लेंगे। जिससे उन्हें थोराकोस्कोपी की महत्वपूर्ण तकनीक सीखने का अवसर मिलेगा और समाज को इसका प्रत्यक्ष लाभहोगा।
कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) एस. के. कटियार, पूर्व प्राचार्य एवं डीन, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर तथा चेयरमैन, साइंटिफिक कमेटी एवं एकेडमिक फोरम, एनसीसीपी (इंडिया) हैं, जबकि डॉ. संदीप कटियार, आयोजन सचिव की भूमिका निभा रहे हैं।
कार्यशाला का मुख्य विषय मेडिकल थोराकोस्कोपी है यह एक उन्नत एवं न्यूनतम इनवेसिव तकनीक है जो फेफड़ों की झिल्ली (प्लूरा) से जुड़ी बीमारियों जैसे कैंसर एवं तपेदिक के निदान एवं उपचार में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।
कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएँ
•हाई-फिडेलिटी मैनक्विन्स पर है इस-ऑन ट्रेनिंग सेशन
•थोराकोस्कोपिक उपकरणों एवं तकनीकों का प्रदर्शन
•राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों द्वारा वैज्ञानिक व्याख्यान एवं पैनल चर्चा
कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए प्रो. कटियार, ने कहा कि ऐसे स्किल-बेस्ड प्रशिक्षण मंच आधुनिक श्वसन चिकित्सा में अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि थोराकोस्कोपी अब उन प्लूरल रोगों के निदान में प्रमुख उपकरण बन चुकी है. जो पारंपरिक विधियों से निदान योग्य नहीं रह पाते। उन्होंने कहा, “आज की मेडिकल शिक्षा में ज्ञान, तकनीक और व्यावहारिक प्रशिक्षण तीनों का समन्वय आवश्यक है। ‘थोरेकोविज़न’ जैसे कार्यक्रम चिकित्सकों की नैदानिक दक्षता बढ़ाते हैं, आत्मविश्वास विकसित करते हैं और अंततः रोगियों के हित में बेहतर उपचार सुनिश्चित करते हैं।”
डॉ. संदीप कटियार, आयोजन सचिव, जो थोराकोस्कोपी में राष्ट्रीय विशेषज्ञ हैं और 2,500 से अधिक प्रक्रियाओं का अनुभव रखते हैं, ने बताया कि यह तकनीक प्लूरल मालिग्नेंसी (कैंसर) के निदान में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो अन्यथा अनदेखी रह सकती है और रोग की प्रगति को बढ़ा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि धोराकोस्कोपी एम्पायमा (प्लूरल कैविटी में मवाद) के उपचार में भी प्रभावी है और कई मामलों में शल्य चिकित्सा (सर्जरी) की आवश्यकता से बचा सकती है।
डॉ. शालिनी मोहन, सचिव, आईएमा कानपुर शाखा ने कहा कि आईएमए अपने सदस्यों के लिए सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
डॉ. विशाल सिंह, वित्त सचिव (IMA), ने बताया कि प्रतिभागियों से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है तथा राज्य के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पीजी छात्रों के लिए निःशुल्क परिवहन की व्यवस्था की गई है।
डॉ. दीपक श्रीवास्तव, वैज्ञानिक सचिव ने कहा कि देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ अपने अनुभव इंटरएक्टिव सेशन्स के माध्यम से साझा करेंगे।
डॉ. कुश पाठक सह-वैज्ञानिक सचिव (IMA) ने बताया कि सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट ऑफ अटेंडेंस प्रदान किए जाएंगे।
इस वर्ष का ‘थोरेकोविज़न’ विशेष महता रखता है क्योंकि यह प्रो. कटियार, की 50 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा का प्रतीक है। इस अवसर पर उनके अनेक पूर्व छात्र- जो आज देशभर में अग्रणी पल्मोनोलॉजिस्ट के रूप में गर्यरत हैं- उनके शैक्षणिक, शोध एवं नैदानिक योगदान का सम्मान करने हेतु एकत्र होंगे।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित यह आयोजन शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं व्यावसायिक विकास के मध्य सहयोग की भावना को दर्शाता है। इसका उद्देश्य चिकित्सकों एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों में थोराकोस्कोपिक दक्षता को और सुदृढ़ करना है।
थोरेकोविज़न-2025 एनसीसीपी (इंडिया) एवं आईएमए कानपुर की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके अंतर्गत श्वसन एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन में विश्वस्तरीय शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ताकि नैदानिक ज्ञान को सशक्त किया जा सके और समाज के स्वास्थ्य की दिशा में बेहतर योगदान दिया जा सके।
