कानपुर; दिनांकः 01.12.2025
*कानपुर मेट्रोः कानपुर सेंट्रल से स्वदेशी कॉटन मिल रैम्प के बीच ‘अप-लाइन टनल’ में ट्रैक की ढलाई का कार्य हुआ आरंभ*

*’अप-लाइन टनल’ में रेल बिछाने के बाद हुई ट्रैक स्लैब की ढलाई की शुरुआत*

कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के कॉरिडोर-1 के बैलेंस सेक्शन (कानपुर सेंट्रल – नौबस्ता) के अंतर्गत लगभग 3 किमी लंबे अंडरग्राउंड सेक्शन (कानपुर सेंट्रल – स्वदेशी कॉटन मिल रैम्प) की ‘अप – लाइन टनल’ में रेल (पटरी) बिछाने और वेल्डिंग का कार्य पूर्ण होने के बाद अब ट्रैक स्लैब की ढलाई प्रक्रिया की शुरुआत कर दी गई है।

उक्त सेक्शन के ‘अप-लाइन टनल’ में रेल (पटरी) बिछाने का कार्य अक्टूबर माह के अंत में आरंभ किया गया था। इसके लिए स्वदेशी कॉटन मिल के निकट स्थित रैम्प से 18 मीटर लंबी रेल पटरियों एवं फ्लैश बट वेल्डिंग प्लांट को नीचे उतारकर वेल्डिंग प्रक्रिया की शुरुआत की गई थी। अब उक्त टनल में वेल्डिंग का कार्य पूरा होने के बाद इन रेल पटरियों के नीचे ट्रैक स्लैब की ढलाई का काम आरंभ कर दिया गया है। ट्रैक में डिरेलमेंट गार्ड एवं थर्ड रेल लगाने की व्यवस्था भी की जाएगी। उक्त सेक्शन के ‘डाउनलाइन टनल’ में भी रेल (पटरी) बिछाने का कार्य जल्द आरंभ करने की योजना है।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक श्री सुशील कुमार ने कहा, “कानपुर सेंट्रल से स्वदेशी कॉटन मिल रैम्प के बीच ‘अप-लाइन टनल‘ में रेल (पटरी) बिछाने और वेल्डिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब ट्रैक की ढलाई (कास्टिंग) का कार्य भी आरंभ कर दिया गया है। अंडरग्राउंड सेक्शन से ‘आजाद’ एवं ‘विद्यार्थी’ टनल बोरिंग मशीनों के ‘रिट्रीवल‘ के साथ ही ट्रैक निर्माण कार्य में और भी तेजी आई है। बारादेवी से नौबस्ता तक 5.3 किमी लंबे एलिवेटेड सेक्शन में ट्रैक निर्माण पहले ही पूरा किया जा चुका है। समय की बचत के लिए ट्रैक निर्माण के साथ-साथ स्टेशनों पर फिनिशिंग एवं सिस्टम इंस्टॉलेशन का कार्य भी समानांतर आगे बढ़ रहा है। हमारी टीम लक्ष्य प्राप्ति के लिए पूरे समर्पण के साथ कार्य कर रही है।”

*मेट्रो ट्रैक की विशेषताएं*
कानपुर मेट्रो में ट्रेन परिचालन हेतु बैलास्ट-लेस (गिट्टी-रहित) ट्रैक प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। इस प्रकार के ट्रैक में रखरखाव की आवश्यकता न्यूनतम होती है तथा इनका जीवन-चक्र भी लंबा होता है। ट्रैक की रेलें हेड-हार्डेंड तकनीक से निर्मित हैं, जिनका उपयोग उच्च गति वाले फ्रेट कॉरिडोरों में भी किया जाता है।

गौरतलब है कि लगभग 24 किमी लंबे कॉरिडोर-1
(आईआईटी-नौबस्ता) पर वर्तमान में लगभग 16 किमी (आईआईटी-कानपुर सेंट्रल) तक यात्री सेवाएं संचालित हैं। कॉरिडोर-1 के बैलेंस सेक्शन (कानपुर सेंट्रल – नौबस्ता) के साथ-साथ लगभग 8.60 किमी लंबे कॉरिडोर-2 (सीएसए – बर्रा-8) का सिविल निर्माण कार्य भी तीव्र गति से जारी है।

 

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