ज़रूरत है सख्त जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एक्ट की

तभी सुरक्षित होगा लोक तंत्र का चौथा स्तंभ
विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक व्यवस्था में अगर देखा जाए तो आज के परिदृश्य में कहे जाने वाले चौथे स्तंभ लाचार व वेबस नजर आ रही है क्योंकि जहां सरकारी तंत्र पत्रकारों के जान माल के सुरक्षा को लेकर लापरवाह है वहीं माफियाओं का मनोबल काफी बड़ा हुआ ।
प्रतापगढ़ के रिपोर्टर शुलभ श्रीवास्तव की हत्या कहीं न कहीं माफियाओं के दुस्साहस का सजीव उदाहरण दे रहे हैं।
प्रशासन को दो दिन पहले ही सूचना मिलने के बाद भी हाथ में हाथ डाल कर बैठे रही वहीं अपराधियों ने फिर से कलम के सिपाही को बीच सड़क पर रौंदने का दुस्साहसी बारदात किया है।
ऐसी स्थिति में जरूर है जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एक्ट की जिसमें सरकार प्रत्येक पत्रकार साथियों के सुरक्षा की गारंटी ले बर्ना देश का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले जर्नलिस्ट सबसे असहाय व असुरक्षित हैं ,जिसमें निष्पक्ष व निर्भीक पत्रकारिता केवल कपोल कल्पित हो जायेगी।
अतः सभी पत्रकार एसोसिएशन व संगठनों को एक मंच पर आकर जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग करें व प्रतापगढ़ में घटित सही निष्पक्ष जांच हो ताकि अपराधियों के दुस्साहस का अंत हो सके।
आशीष कुमार मिश्र एडवोकेट उच्च न्यायालय इलाहाबाद प्रयागराज।
लीगल एडवाइजर ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन वाराणसी।
लीगल एडवाइजर आल प्रेस एन्ड राइटर्स एसोसिएशन वाराणसी।
राष्ट्रीय कानूनी सलाहकार जर्नलिस्ट काउन्सिल ऑफ इंडिया।

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