मान्यवर,🙏
जब से मैन महारानी लक्ष्मीबाई जी की धरोहर (किले की पहाड़ी) का मूल स्वरूप बचाने का अभियान प्रारम्भ किया तब से मेरे कुछ व्यक्तिगत मित्र, कुछ मीडिया के साथी, कुछ राजनैतिक मित्र मुझसे नाराज हो गए है।
हो सकता है कि उनकी नज़र में मैं विकास कार्य का विरोध कर रहा हूँ।
मेरे पास साक्ष्य है कि जिस स्थान पर विकास कार्य करने की बात की जा रही है वहाँ किसी भी परिस्तिथि में कोई कार्य किया ही नही जा सकता।
आइए और देखिये किले की पहाड़ी को छोड़ कर पहाड़ी की तलहटी में पाथ वे एवं विकास कार्य का ढांचा तैयार हो रहा है वो अभी से कितना सुन्दर दिखाई देने लगा है।
अति संरक्षित क्षेत्र में दर्ज है महारानी का किला इसकी पहाड़ी की मिट्टी से भी छेड़ छाड़ नही की जा सकती।
👉जिस तरह से किले की पहाड़ी को पोकलिंग मशीन से खोदा गया और दर्जनों बड़ी- बड़ी चट्टाने नीचे गिरादी गई है। इससे यह शंका बन गई है कि अत्यधिक वारिश होने की स्तिथि में मिट्टी के बहाव से कालान्तर में भूस्खलन का खतरा बन जायेगा जिससे किले के धसकने का डर बना रहेगा।
आज आप भले ही मुझे विकास विरोधी समझे पर जब आपके सामने पूरी सत्यता आएगी तो आप स्वयं कहेंगे की महारानी के किले पर अवैध कार्य करने वालो के खिलाफ कार्यवाही होना चाहिए।
जल्दी आपको वास्तविकता से वाकिफ करवाऊंगा उसके बाद आप साथ दे या विरोध करे वो आपकीं मर्जी।
🤝 मैंने तो संकल्प ले लिया है कि महारानी के किले की पहाड़ी को उसके पूर्व स्वरूप में लाने के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करूँगा
कानून आम आदमी और नेता/ अधिकारी/ बड़े आदमियों के लिए अलग नही होता है। किले की पहाड़ी पर पुरातत्व एक्ट के विरोध में निर्माण कार्य हो रहा है और सारे बड़े अधिकारी चुप बैठे है।
मेरे पास सारे कागज है जो में शीघ्र आपको उपलब्ध करवाऊंगा।
मैं बहुत छोटे स्तर का व्यक्ति हूँ। मेरी माँ ने मुझे सिखाया है कि गलत कार्य का पूरी शक्ति लगाकर विरोध करना। कभी ये मत सोचना की इससे कितना लाभ या हानि हो रही है , रुकना तब जब कामयाब हो जाओ।
सत्यता जानने के बाद हो सके तो अपना गुस्सा समाप्त कर दीजियेगा।
आपका
भानू सहाय अध्यक्ष
बुन्देलखण्ड निर्माण मोर्चा
9415588500
