मां बागेश्वरी का दूसरा घर कानपुर के मझावन मे स्थित पसे पूरवा गांव मे

कानपुर के माझवन के पसे पुरवा में स्थित मां बागेश्वरी के प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर के बारे में कहा जाता है नेपाल के बाद मां बागेश्वरी का दूसरा घर कानपुर के मझावन मे स्थित पसे पूरवा गांव मे मन्दिर है यहां को लेकर पौराणिक बातें हैं।
प्राचीन काल में यहां पर लोग मां को अपनी जीभ अर्पित करते थे इस मंदिर की खासियत है कि यहां पर पूरे भारतवर्ष के भक्त आते हैं कहां जाता है कि यहां पर हर मनोकामना पूर्ण होती है कार्तिक पूर्णिमा पर यहां पर विशाल मेले का आयोजन होता है अनंत चतुर्दशी पर यहां पर दंगल का आयोजन होता है साथी साथ माघ महीने कि हर सोमवार को यहां पर मेले का आयोजन होता है यहां पर हर तरफ आपको हरियाली देखने को मिलेगी श्रद्धालुओं के बैठने के लिए उचित व्यवस्था है यज्ञशाला से लेकर कुए की व्यवस्था भी यहां पर की गई है इसकी सबसे प्राचीन बात यह है कि नेपाल के बाद अगर कोई दूसरा बागेश्वरी मां का मंदिर है तो वह कानपुर में स्थित है
जब हमने यहां की देखरेख करने वाले लोगों से बातचीत की तो उन्होंने बताया यहां पर मेले का आयोजन होने के साथ ही यहां उसके साथ कई पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं बिल्कुल यह मंदिर नेपाल स्थित बागेश्वरी मंदिर की तरीके ही बना हुआ है चारों तरफ हरियाली है पेड़ पौधे हैं इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है की मां के भक्तों को किसी प्रकार की कोई दिक्कत ना नही होती हैं। दंगल का आयोजन होने के साथ ही जनप्रतिनिधि भी आते जाते रहते हैं।मां बागेश्वरी के पावन मंदिर में और आशीर्वाद लेते हैं l

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