कानपुर 20 जुलाई । निर्माण सेवा संस्थान द्वारा आज कानपुर प्रेसक्लब में सूरज से समृद्ध अभियान के अंतर्गत सौर ऊर्जा पर जन घोषणा पत्र को लेकर एक प्रेसवार्ता की।
वार्ता में बताया कि उ0प्र0 की आबोहवा में प्रदूषण का वार्षिक औसत, नई दिल्ली के बाद दूसरे स्थान पर है। इसी कारण कई लाख लोगों की मौतें भी हो गई। आंकड़े बताते हैं कि इससे सबसे अधिक आर्थिक नुकसान उ0प्र0 का ही हुआ है। आर्थिक विकास के परिपेक्ष्य में एक स्पष्ट बदलाव कई देशों में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश राज्य के विकास पुनः सुनहरा अवसर प्रदान करता है।
सौर ऊर्जा का ही पूरे पर्यावरण पर सबसे कम नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सोलर पैनलों से उत्पादित बिजली से ग्रीन हाउस गैस नहीं बनती है जबकि जीवाश्म संसाधनों में भी प्रदूषण नहीं घुलता है ।
राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के आंकलन के अनुसार भारत की कुल सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता लगभग 748 जी डब्ल्यू है जो देश की लगभग 3 % ही है। अगर हम इस बंजर क्षेत्र में सोलर रूफ में बदलते हैं तो उसकी उपयोगिता कई गुना बढ़ जायेगी और कीमत पर घरों, कृषि, व अन्य उद्योगों को रोशन कर सकने के सुनहरा अवसर प्रदान करता है।
इन सन्दर्भ में निर्माण सेवा संस्थान ने अपनी माँग की है-
सौर ऊर्जा नीति की वार्षिक समीक्षा हो।
उ0प्र0 के अन्य शहरों को भी उनकी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक प्रसांगिकता के आधार पर सोलर सिटी योजना में शामिल किया जाए।
रूफ सोलर इंस्टालेशन में कम से कम 50 % की सब्सिडी दी जय।
इंस्टालेशन में ऋण सुविधा को आसान बनाया जाय।
सरकारी कल्याण योजना में ऐसे परिवारों को प्रोत्साहित किया जाय।
नए भवनों, सोसायटी को सौर ऊर्जा स्थापित करना अनिवार्य किया जाय।
ज़िला स्तर पर सभी सरकारी कार्यालयों सौर ऊर्जा यूनिट की स्थापना अनिवार्य किया जाय।
सोलर ऊर्जा क्षेत्र में ग्रीन जॉब के अवसर पैदा किए जांय।
2021-07-20
