तीन एफआइआर का अब तक पता नहीं लगा

कानपुर। शत्रु संपत्तियों पर कब्जे व खरीद फरोख्त के आरोप में आनलाइन दर्ज कराई गईं तीन एफआइआर का अब तक पता नहीं लगा है। वह थानों के सीसीटीएनएस सर्वर पर नहीं पहुंचीं, लिहाजा उनमें जांच भी शुरू नहीं हो सकी है। खास बात ये है कि मुकदमे लिखाने वाले वादी ने भी पुलिस से संपर्क नहीं किया। इन मुकदमों में ही मुख्य आरोपित मुख्तार बाबा व उसके सहयोगियों का नाम लिखाया गया था।

कंघीमोहाल स्थित शत्रु संपत्ति की खरीद फरोख्त के मामले में डिग्री कालेज के प्राचार्य डा. जमाल की ओर से फरवरी में मुकदमा लिखाया गया था। बजरिया पुलिस ने दो दिन पहले ही संपत्ति बेचने वाले इशरत उल्ला, इबादत उल्ला, तसनीम अफशां और खरीदार मो. फरहान को आरोपित मानते हुए चार्जशीट दाखिल की है। यही नहीं, कंघीमोहाल वाली संपत्ति का मुकदमा होने के बाद शत्रु संपत्ति संरक्षण संघर्ष समिति के सचिव सैयद अदीबुल कदर ने जिला प्रशासन को प्रार्थनापत्र भेजकर हीरामन का पुरवा स्थित भूमि व अहाते पर कब्जा होने की भी शिकायत की थी। प्रार्थनापत्र में आरोप लगाया था कि इलाके में रहने वाले मुख्तार बाबा और उसके साथी जामी पड़वा साथियों के साथ मिलकर करीब 23 करोड़ रुपये की इस संपत्ति को बेच रहे हैं और किराया वसूल रहे हैं, जबकि यह संपत्ति शत्रु संपत्ति घोषित है। इसी तरह अनवरगंज स्थित बशीर एस्टेट और रावतपुर के रोशन नगर स्थित एक शत्रु संपत्ति पर भी कब्जा होने की शिकायत की गई थी। जिला प्रशासन की जांच के बाद तहसीलदार अतुल कुमार ने तीनों मामलों में ऑनलाइन ई-एफआइआर दर्ज कराई थी। अनवरगंज थाना प्रभारी गंगाधर सिंह चौहान ने बताया कि ई-एफआइआर की प्रति उन्हें अब तक नहीं मिली। कल्याणपुर थाना प्रभारी वीर सिंह ने भी शत्रु संपत्ति के संबंध में किसी भी ईएफआइआर की जानकारी से इन्कार किया। दोनों थाना प्रभारियों ने कहा कि वादी सीधे आकर तहरीर दे सकते हैं। अब तक किसी ने भी संपर्क नहीं किया है।

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