चित्रकूट के राजापुर और मऊ में यमुना व पयस्वनी नदी का जलस्तर बढ़ने से राजापुर व मऊ क्षेत्र के कई गांव पानी से घिर गए है। पानी घरों तक पानी पहुंच गया है। किसानों की हजारों बीघे खेती जलमग्न हो गई है। मऊ क्षेत्र के मवई गांव की हालत सबसे अधिक खराब है। राजापुर क्षेत्र के अर्की, सरधुआ मार्ग में बने कई पक्के मकान भी डूबने लगे है। लोग मकान खाली कर सुरक्षित स्थान पर जाने लगे है। राजापुर क्षेत्र में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ जाने से कई गांवों का संपर्क कट गया है। पानी के कारण कई रास्ते पूरी तरह से बंद हो गए। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक अधिकारी सहित पुलिस के बल जवान राहत कार्य में लगे है।
रविवार को यमुना नदी का जलस्तर 91.70 मीटर पहुंच गया है। खतरे का निशान 93.20 मीटर है। प्रतिघंटे तीन सेमी पानी बढ़ने से देर रात तक नदी खतरे के निशान को पार कर सकती है। मऊ क्षेत्र केे मवई गांव की हालत सबसे अधिक खराब हो गई है। गांव में चारों ओर पानी भर गया है। गांव का सचिवालय सहित सामुदायिक शौचालय में पानी भर गया है। गांव के आसपास की खेती पूरी तरह से जलमग्न हो गई है। मंडौर,मनकुआर, बड़ियारी कला, टिकरा, पूरब पताई पताई आदि यमुना नदी के पानी से घिर गए है। एक दूसरे से संपर्क टूट गया है। गांव के आसपास की फसल भी जलमग्न हो गई है। जिसमें सब्जी का सबसे अधिक नुकसान हुआ है। नदियों के किनारे बसे गांव अर्की, बेलास, चिल्लीमल, चांदी, तीरधुमाई, गंगू, धौरहरा, नैनी, गुरगौला, बिहरवा,बक्टा, देवारी, सुरवल, हस्ता, खोपा व भदेहदू यमुना नदी व पायस्वनी नदी के पानी से घिरते जा रहे है। अर्की गांव के पास टापू बन गया है। नाव से ही आवगमन हो रहा है।
बाढ़ की रोकथाम के लिए तटबंध बनाएं
मऊ। यमुना नदी में आई बाढ़ को लेकर समाजसेवी इंद्रेश त्रिपाठी का कहना कि बाढ़ की स्थिति हर वर्ष आती है। जिसकी रोकथाम के लिए रास्तों व गांव के पास तटबंध बनाये जाये। किसान मिथलेश कुमार कहना कि बाढ़ के कारण बीमार वृद्धों को इलाज की समस्या खड़ी हो जाती है। जिससे डाक्टरों की टीम भेजनी चाहिए। किसान देव नाथ त्रिपाठी का कहना कि बाढ़ आने से कई किसानों की फसल पूरी तरह से डूब गई है। जिसके नुकसान की भरपाई की जाए।
