भाजपा कानपुर महानगर उत्तर जिले ने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई जी के जन्म शताब्दी पर्व पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए

भाजपा कार्यालय नवीन मार्केट में अटल जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर लगाई गई उनके चित्रों की प्रदर्शनी

प्रदर्शनी का उद्घाटन क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल सांसद रमेश अवस्थी ने किया

जिला अध्यक्ष दीपू पांडे सलिल बिश्नोई नीलिमा कटियार अरुण पाठक,क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी अनूप अवस्थी सुरेश अवस्थी ,पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश राय जिला मीडिया प्रभारी अनुराग शर्मा ने कार्यकर्ताओं के संग किया प्रदर्शनी का अवलोकन व गरीबों को कंबल वितरण किया।

प्रातः ११ बजे नवीन मार्केट कार्यालय में लगी अटल प्रतिमा पर महापौर प्रमिला पांडे पूर्व महापौर रवींद्र पाटनी सहित सभी पदाधिकारियों ने किया पुष्पअर्चन

कार्यालय में आयोजित हुई संगोष्ठी जिसमें क्षेत्रीय अध्यक्ष *प्रकाश पाल* सांसद *रमेश अवस्थी* सहित दर्जनों नेताओं ने संबोधित करते हुए अटल जी के दर्शन को रखते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी, भारत के दसवें प्रधानमंत्री और भारतीय राजनीति के एक अमर नक्षत्र, का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में हुआ। वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संस्थापक सदस्य थे और अपनी विद्वता, सौम्यता, और ओजस्वी वक्तृत्व शैली के लिए विख्यात रहे। वाजपेयी का पूरा जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण, आदर्शों और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। उनकी कविताएं, विचार और नेतृत्व भारतीय राजनीति में अनूठा स्थान रखते हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी के पिता का नाम कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता का नाम कृष्णा देवी था। उनके पिता एक शिक्षक और कवि थे, जिसका प्रभाव अटल जी के जीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। वाजपेयी ने प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर के सरस्वती शिशु मंदिर से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मीबाई कॉलेज) से राजनीति शास्त्र और हिंदी साहित्य में स्नातक किया। फिर कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति शास्त्र में एमए किया।

अटल बिहारी वाजपेयी 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सक्रिय राजनीति में आए। हालांकि वे आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से जुड़े थे और संघ के प्रचारक के रूप में कार्य करते रहे। उनकी राजनीति का आरंभ भारतीय जनसंघ से हुआ, जिसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने स्थापित किया था।

1957 में, अटल जी पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए। उनकी प्रतिभा और उत्कृष्ट भाषण कला ने उन्हें शीघ्र ही संसद में ख्याति दिलाई। उन्होंने जनसंघ के अध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत किया और भारतीय राजनीति में दक्षिणपंथी विचारधारा को सशक्त मंच प्रदान किया।

भारतीय जनता पार्टी की स्थापना

1977 में जनता पार्टी सरकार के अंतर्गत वाजपेयी ने विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया। इसी दौरान, उन्होंने भारत का नाम विश्व स्तर पर सम्मानित किया। 1980 में, जनता पार्टी से असंतोष के चलते उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी और अन्य नेताओं के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की स्थापना की। भाजपा के “गांधीवादी समाजवाद” के विचार को उन्होंने बढ़ावा दिया।

अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने

परमाणु परीक्षण कराकर भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश बनाया।

1998 में अटल जी के नेतृत्व में भारत ने राजस्थान के पोखरण में सफल परमाणु परीक्षण किया। यह भारत को वैश्विक शक्ति के रूप में पहचान दिलाने का ऐतिहासिक क्षण था। देश में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए इस परियोजना की शुरुआत की गई।

उदारीकरण की प्रक्रिया को गति दी और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

काव्य और साहित्य में योगदान

अटल बिहारी वाजपेयी न केवल राजनेता थे, बल्कि एक महान कवि और साहित्यकार भी थे। उनकी कविताएं उनकी गहरी संवेदनशीलता और राष्ट्रप्रेम को दर्शाती हैं। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में “मेरी इक्यावन कविताएं” और “संसद में तीन दशक” शामिल हैं। उनकी कविताओं में संघर्ष, संकल्प और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रेम की झलक मिलती है।

1992 में पद्म विभूषण

1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार और बेस्ट सांसद अवार्ड

2015 में भारत रत्न, देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान।

अंतिम दिन और विरासत

16 अगस्त 2018 को लंबी बीमारी के बाद दिल्ली के एम्स अस्पताल में अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया। उनकी मृत्यु से देश ने एक महान नेता, कवि और मार्गदर्शक को खो दिया। उनकी विरासत आज भी देशवासियों को प्रेरित करती है।

अटल बिहारी वाजपेयी न केवल भारत के प्रधानमंत्री थे, बल्कि वे एक ऐसे जननेता थे जिन्होंने अपने आदर्शों और कर्तव्यनिष्ठा से करोड़ों लोगों के दिलों में स्थान बनाया। उनके द्वारा स्थापित आदर्श, उनकी काव्यात्मक शैली, और उनका दूरदर्शी नेतृत्व आज भी भारत के विकास और प्रगति के मार्गदर्शक बने हुए हैं। उनका जीवन राष्ट्रसेवा का जीता-जागता उदाहरण है ।

संगोष्ठी की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष दीपू पांडे ने तथा संचालन महामंत्री अवधेश सोनकर ने किया ।

संगोष्ठी में मुख्य रूप से ….प्रकाश शर्मा,हरीश मातरेजा , विजय सिंह सेंगर, संतोष शुक्ला,आनंद मिश्रा उमेश निगम अनिल दीक्षित,,पूनम कपूर, रामलखन रावत,रंजीता पाठक,आशा पाल प्रमोद त्रिपाठी,जन्मेजय सिंह,विनय पटेल,अनुपम मिश्रा, रोहित साहू धीरज बाल्मिकी,हिमांशु शर्मा, ।अभिनव दीक्षित,जीतू कश्यप, विधि राजपाल,सुनीता गौड़,उर्मिला अवस्थी ,अंशु ठाकुर,मनोज प्रधान, सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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