डीएम से गलत तरीके से बात करने में संविदा चिकित्सक बर्खास्त, प्रभारी चिकित्साधिकारी का छिना चार्ज
फर्रूखाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मचारी अपने कार्यों के प्रति कितने गंभीर हैं, इसका राजफाश शनिवार को जिलाधिकारी के निरीक्षण में हो गया। डीएम को प्रभारी चिकित्साधिकारी समेत 15 कर्मचारी गायब मिले। इस पर डीएम के आदेश पर मुख्य चिकित्साधिकारी ने प्रभारी चिकित्साधिकारी को चार्ज से हटा दिया। वहीं गलत लहजे बात करने पर संविदा चिकित्सक को बर्खास्त कर दिया गया। डीएम ने पूरे मामले में सीएमओ से भी स्पष्टीकरण मांगा है।
जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने शनिवार को निरीक्षण करने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। उन्होंने निर्माणाधीन वेयर हाउस देखा और मौजूद इंजीनियर संजू से कार्य की प्रगति व ठेकेदार के बारे में जानकारी ली। इसके बाद जिलाधिकारी ने आक्सीजन प्लांट देखा। आपरेटर शुभम पासवान ने बताया कि आक्सीजन प्लांट में तकनीकी खराबी है। उन्होंने स्टेपलाइजर की मांग की। बताया गया कि एल-1 में आक्सीजन की सप्लाई नहीं हो रही है।
जिलाधिकारी ने उपस्थित रजिस्टर देखा तो प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. गौरव यादव, डा. सौरभ कटियार, डा. प्रशांत, डा. असमा वसीम आदि कर्मचारी मिले। बताया गया कि डा. गौरव यादव जिला मुख्यालय पर बैठक में गए हैं, लेकिन इसका उल्लेख भ्रमण रजिस्टर पर अंकित नहीं पाया गया। जांच में पाया गया कि विगत एक माह से एक्स-रे टेक्नीशियन न होने के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक्स-रे नहीं हो पा रहे हैं। एक्सरे व ब्लड परीक्षण लैब में भी रुचि नहीं ली जा रही।
केवल तीन मरीजों के ही ब्लड सेंपल लिए गए। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में बताया जाता है कि जननी शिशु सुरक्षा योजना के अंतर्गत प्रसव के बाद प्रसूता को महिला वार्ड में रखकर सभी अनुमन्य व्यवस्थाएं दी जाती हैं, लेकिन जांच पाया गया कि प्रसव के बाद प्रसूताओं को महिला वार्ड में 48 घंटे नहीं रोका जा रहा है। स्टाफ द्वारा बताया गया कि शुक्रवार को चार और शनिवार सुबह दो प्रसव हुए। मौके पर एक भी प्रसूता महिला वार्ड में भर्ती नहीं पाई गई। जिलाधिकारी ने प्रभारी चिकित्साधिकारी को तत्काल हटाते हुए विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अव्यवस्थाओं को देखते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा। जिलाधिकारी से गलत लहजे में बात करने पर संविदा चिकित्सक पुष्पेंद्र सिंह को बर्खास्त कर दिया गया। संविदा चिकित्सक ने डीएम से कहा कि आप ही डीएम हो। इसके बाद वह प्रभारी चिकित्साधिकारी की कुर्सी पर बैठ गए। इस पर डीएम का पारा चढ़ गया। शनिवार को संविदा चिकित्सक ज्वाइङ्क्षनग करने के लिए सीएचसी पर पहुंचे थे। सीएमओ ने बताया कि डीएम के आदेश पर संविदा चिकित्सक को बर्खास्त कर दिया गया है। जब कि प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. गौरव यादव को चार्ज से हटा दिया गया है।
यह मिले अनुपस्थित : डा. प्रशांत, डा. सौरभ कटियार, डा. आसमा वसीम, वार्ड आया सोनी, सफाई कर्मी आनंद कुमार, संविदा कर्मी सरिता पाल, स्टाफ नर्स समता यादव, एलटी संजय, खुर्शीद आलम, आराधना चौधरी, स्टाफ नर्स जैस्मिन सोलोमन, ललिता श्रीवास्तव, हरेंद्र कुमार, पीयूष व अनुज सुमन। इन सभी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
बाहर से मंगवाई जाती दवाएं :
जिलाधिकारी ने डार्क रूम देखा। डा. सोनी ने बताया कि एक्स-रे सामग्री नहीं है, इसलिए एक्सरे नहीं हो रहे हैं। रक्त की जांच में सैम्पलिंग कम मिली। शनिवार को मात्र दो सैंपल ही लिए गए थे। गांव मुरान निवासी ममता ने बताया कि वार्ड आया प्रसूताओं को अभद्र व्यवहार करती हैं। बाहर से दवाएं मंगवाई जाती हैं।
प्रसूताओं को नहीं मिलता खाना
जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान मौजूद महिलाओं से भोजन के बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि यहां पर खाना नहीं दिया जाता है। प्रसव के बाद प्रसूता को तत्काल डिस्चार्ज कर दिया जाता है। वार्ड आया आरती ने बताया कि शनिवार को दो प्रसव हुए थे, उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। वार्ड आया ने बताया कि प्रसूता को खाना मिलता है। जब जिलाधिकारी ने रसोई के बारे में पूछा तो वह हक्की बक्की रह गई। शौचालय के निरीक्षण में यूरिन पाइप भी गायब मिले। बताया गया कि प्रभारी चिकित्साधिकारी मुख्यालय पर बैठक में गए थे।
