कानपुर

 

लावारिस लाशों के मसीहा कानपुर के धनीराम पैंथर, अब तक 13 हजार से अधिक लाशों का कराया अंतिम संस्कार

 

समाज कल्याण सेवा समिति के बैनर तले एक छोटे कद के लेकिन असमान से बड़े हौसले वाले शख्स ने कानपुर की अब तक 13 हजार से अधिक लावारिस लाशों का वारिस बन कर उनका अंतिम संस्कार कराया और आज उन्हीं लावारिस दिवंगत आत्माओं के लिए कानपुर के फूलबाग स्थित गांधी प्रतिमा स्थल पर सर्व धर्म प्रार्थना सभा और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर सभी दिवंगत आत्माओं के लिए ईश्वर से प्रार्थना करी कि वह उन सभी दिवंगतों को अपने चरणों में उचित स्थान प्रदान करें ।

 

साल 2008 में धनीराम पैंथर ने समाज कल्याण सेवा समिति का गठन करते हुए सर्व धर्म की लावारिश लाशों के अंतिम संस्कार के लिए जो मुहिम शुरू करी थी वह आज तक रुकी नहीं, धनीराम समाज के हर वर्ग का सहयोग मांग कर अपनी मुहिम को आगे बढ़ाते चले आ रहे हैं ।

जहां कोरोना के वक्त लाखों लोगों की जान जा रही थी और उनके अपने भी उनके शरीर को हाथ लगाने से कतरा रहे थे, वहीं धनीराम ने अपने 25 आदमियों की टीम के साथ दिन-रात मास्क दस्ताने और कोरोना किट पहनकर लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाते हुए लगातार काम किया उस समय भी धनीराम ने, जो जिस वर्ग जो जिस धर्म का था उसका उसके हिसाब से अंतिम संस्कार किया, धनीराम बताते है कि उन्होंने इंसानियत को मरते देखा तो उनका जमीर जाग गया और उन्होंने मन ही मन सोचा कि जब कोई लावारिस पैदा नहीं होता तो लावारिस क्यों मरेगा । यह विचार कानपुर के पांच फीट के धनीराम के जीवन की सच्चाई बन गई ।

बिना किसी सरकारी सहयोग से धनीराम के इस बड़े काम के बारे में जिसने भी सुना वह दंग रह गया । समाज कल्याण सेवा समिति को इस काम के लिए उन्होंने तैयार किया और लोगों से अपने काम में मदद मांग कर समाज के लिए कुछ करने निकल पड़े । आगे धनीराम बताते हैं कि साल 2008 का समय था जब कानपुर में लावारिस लाशों के साथ उन्होंने दुर्व्यवहार अमानवियता होते देखी, कानपुर के पोस्टमार्टम हाउस में आने वाली लावारिस लाशों को देर शाम एक रिक्शे में बांधकर गंगा जी में गंगा पुल से फिकवाने का काम किया जा रहा था, कोरोना काल के समय उन्होंने में 2700 से अधिक लोगों का अंतिम संस्कार किया ।

 

अब तक वह 13000 से ज्यादा लावारिस शवों के साथ कोरोना काल में 2700 से अधिक लोगों का अंतिम संस्कार विधि-विधान से उनके धर्म के अनुसार करवा चुके हैं ।

 

धनीराम की मुहिम पर जिला प्रशासन ने उन शवदाह ग्रहों को ठीक कराया जो काफी लंबे समय से खराब पड़े हुए थे । अब वर्तमान में इन्हीं शव दाह ग्रहों में लावारिस शवों का अंतिम संस्कार उनकी बनाई समाज कल्याण सेवा समिति द्वारा किया जाता है । धनीराम के अनुसार उनकी मुहिम की शुरुआत में उन्हें बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, उनके पास कोई भी साधन वहां मौजूद नहीं था जिससे शवों को ले जाया जा सके । इसके साथ ही यह काम करने के लिए उन्होंने समाज संगठन से जुड़े लोगों से आग्रह किया इसके बाद शवों के कफन, लकड़ी का इंतजाम खुद करना पड़ता था । लेकिन धनीराम के नेक जज्बे के चलते समाज से उन्हें लगातार काफी सहयोग मिला इसी बलबूते पर उनका इंसानियत की सेवा का काम आजभी निरंतर जारी है

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