कानपुर

 

एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, प्रदेशभर में एक लाख से अधिक दुकानें रहीं बंद

 

उत्तर प्रदेश में कृषि विभाग की लगातार छापेमारी और कार्रवाई से नाराज खाद, बीज और कीटनाशक व्यापारियों ने शनिवार को एक दिन की सांकेतिक प्रादेशिक बंदी कर विरोध दर्ज कराया। एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन के बैनर तले कानपुर में भी लगभग पांच हजार दुकानें बंद रहीं। व्यापारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।

 

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने कहा कि कृषि विभाग की कार्रवाईयों से पूरे प्रदेश में व्यापारियों के बीच भय का माहौल बना हुआ है। विभाग द्वारा लाइसेंस निलंबन, निरस्तीकरण और ECA की धारा 3/7 के तहत मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। इससे मजबूर होकर व्यापारी अपनी दुकानें बंद करने को विवश हो रहे हैं।

 

ज्ञापन में व्यापारियों ने सरकार का ध्यान कई प्रमुख बिंदुओं की ओर आकृष्ट किया:

 

1. एफओआर की सुविधा का अभाव:

 

उर्वरक निर्माता कंपनियां यूरिया को होलसेलर को ₹242 से ₹246 में बिल कर रही हैं, लेकिन परिवहन के लिए मात्र ₹4 से ₹5 ही दिया जा रहा है, जबकि वास्तविक भाड़ा ₹25 से ₹30 तक आता है। वहीं लोडिंग-अनलोडिंग पर भी ₹10 का अतिरिक्त खर्च आता है। भारत सरकार के नियमों के अनुसार सभी खाद की आपूर्ति एफओआर (Free On Rail/Road) के तहत रिटेलर के गोदाम तक होनी चाहिए, जो कि नहीं हो रही है।

 

 

2. अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग:

 

कंपनियां यूरिया के साथ 30–40% तक अन्य उत्पाद भी जबरन टैग कर देती हैं, जो बिक्री न होने की स्थिति में गोदामों में पड़े रह जाते हैं। इससे व्यापारियों की लागत बढ़ जाती है और निर्धारित दर पर खाद किसानों को देना मुश्किल हो जाता है।

 

 

3. कीटनाशकों पर अनुचित कार्रवाई:

 

विभाग द्वारा कीटनाशक की गुणवत्ता पर सवाल उठाकर व्यापारियों के खिलाफ मुकदमे और लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की जा रही है, जबकि इन उत्पादों की रोल परमिशन लखनऊ से होती है। यदि कोई उत्पाद अधोमानक पाया जाता है तो इसकी जिम्मेदारी विक्रेता पर नहीं, निर्माता कंपनी पर होनी चाहिए, क्योंकि विक्रेता सिर्फ मूल पैकिंग में ही अधिकृत कंपनियों का माल बेचते हैं।

 

 

4. 3/7 मुकदमों की वापसी:

 

संगठन की मांग है कि जिन व्यापारियों पर ECA की धारा 3/7 के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें तत्काल निरस्त किया जाए।

 

ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि सरकार ने मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आगामी समय में अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी, जिससे खरीफ सीजन में किसानों को खाद, बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता में भारी संकट उत्पन्न हो सकता है।

 

ज्ञापन सौंपने वालों में एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अतुल त्रिपाठी, जिला अध्यक्ष अश्वनी कटियार, जिला महामंत्री प्रशांत चोला समेत बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे।

 

 

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