ज़िल्लत की ज़िंदगी से भली बा वेकार मौत

 

तेरे फसाने का यही उनवा है ऐ हुसैन

 

 

 

कानपुर। 4 मोहर्रम के मौक़े पर शहर की इमामबाड़ों, मस्जिदों, कर्बलाओं, खानकाहों और मुसलमानों के घरों में बने इमामबारगाहों में मजलिसे अज़ा, इमाम चौकों पर जिक्रे शहादतैन और कुरान ख़्वानी का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। अकीदतमंदों की भारी संख्या इन मजलिसों में शरीक हुई।इमामबाड़ा जनाब अख्तर हुसैन में मजलिस को संबोधित करते हुए ईरान से तशरीफ लाए मौलाना जौन आब्दी साहब ने कहा यज़ीद नुमाइंदा था फिरऔन, शद्दाद, नमरूद, अबू लहब और अबू जहल का; जबकि हज़रत इमाम हुसैन अ.स. नुमाइंदे थे उन्होंने कहा ज़िल्लत की ज़िंदगी से इज़्ज़त की मौत बेहतर है” यही हुसैनी पैग़ाम है, जो हर दौर के लिए मशअलए राह है।वाक़याते कर्बला हमें सिखाता है सच्चाई पर डटे रहना सब्र और इस्तेक़ामत अपनाना ज़ुल्म के सामने झुकने के बजाय आवाज़ बुलंद करना कर्बला सिर्फ एक तारीख़ नहीं, बल्कि एक जिंदा पैग़ाम है जो बताता है कि जब दीन और इंसानियत पर हमला हो, तो खामोशी नहीं, बल्कि कुर्बानी देना इमानी रवैया है।

मजलिस से पहले शायरों ने बारगाहे हुसैनी में मन्ज़ूम अशआर का नजराना पेश किया।मजलिसों में नवाब मुमताज़, राशिद, हैदर, वसी हसन,

इब्ने हसन ज़ैदी,मोनू,नवाब फरहत हुसैन,राशिद अली ज़ैदी,रियासत नवाब,इशरत हुसैन,ज़फरुल रिज़वी, अनवर ज़ैदी, नवाब इम्तियाज़ हुसैन, अली हैदर, अच्छे भाई, नदीम,हसीन, फर्रुख,नवाब आमिर अब्बास,नवाब हुसैन,समीर रिज़वी,ऐमन रिज़वी,सदाक़त हुसैन रिज़वी,अशवाक़ हुसैन, इतियादी शामिल रहे!

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