*वैक्सीन से वंचित 1330 बच्चों के लिए विशेष टीकाकरण अभियान, डीएम ने दिए निर्देश*

 

कानपुर नगर, 07 अगस्त।

 

जनपद में वैक्सीन अवॉइड बिहेवियर के चलते टीकाकरण से वंचित रह गए 1330 बच्चों को अब सुरक्षा कवच प्रदान किया जाएगा। इस उद्देश्य से विशेष टीकाकरण अभियान संचालित किया जाएगा। यह अभियान 12 अगस्त से 22 अगस्त तक चलेगा और कुल सात सत्रों में बच्चों को टीके लगाए जाएंगे।

 

जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में कहा कि यदि एक भी बच्चा टीकाकरण से वंचित रह जाता है, तो बीमारियों के उन्मूलन का सुरक्षा चक्र कमजोर पड़ता है। उन्होंने कहा कि सभी विभागीय अधिकारी अभियान को लेकर माइक्रो स्तर पर प्रभावी योजना तैयार करें और ड्यू लिस्ट हर टीम के पास उपलब्ध हो।

 

शहरी क्षेत्र में 1330 बच्चे चिन्हित किए गए हैं, जो पूर्वाग्रह, सामाजिक परिवेश या गलत धारणाओं के कारण अब तक टीकाकरण से वंचित हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे बच्चों के अभिभावकों को समझाकर प्रेरित किया जाए जिससे कोई भी बच्चा टीके से वंचित न रहे।

 

इस विशेष अभियान के अंतर्गत बच्चों को तपेदिक, पोलियो, खसरा, डिप्थीरिया, काली खाँसी, टेटनस, हेपेटाइटिस-बी, रूबेला, न्यूमोनिया, डायरिया, जापानी इंसेफेलाइटिस और रोटावायरस संक्रमण जैसी 12 गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाए जाएंगे।

 

डीएम ने कहा कि जागरूकता ही इस अभियान की कुंजी है। चिन्हित 35 स्थलों जैसे पत्थरकट्टा डबल पुलिया, विजयनगर मछली मंडी, मछरिया, गढ़ी कबीर नगर, काकादेव, वारिस नगर, चिश्ती नगर, राज नगर और मोती नगर में डोर-टू-डोर संपर्क अभियान चलाया जाएगा। इसमें टीमें अभिभावकों को टीकाकरण के महत्व, सुरक्षा लाभ और बीमारियों से संभावित खतरे की जानकारी देंगी।

 

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरीदत्त नेमी, डॉ यूबी सिंह एसीएमओ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सुरजीत कुमार सिंह, प्रोग्राम ऑफिसर जेएसआई हुदा जोहरा, डॉ हेमंत सहित विभिन्न अधिकारी मौजूद रहे।

 

*सीडीओ ने की आरबीएसके की समीक्षा, दिए आवश्यक निर्देश*

 

मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन की अध्यक्षता में आज सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में उन्होंने निर्देश दिया कि आरबीएसके टीम नियमित अंतराल पर आंगनबाड़ी केंद्रों एवं परिषदीय विद्यालयों में जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच करें। सीडीओ ने कहा कि यह कार्य सुचारू रूप से चले, इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी सुनिश्चित करें कि विद्यालयों में आरबीएसके टीम समय पर पहुंचे और इसकी सूचना उन्हें भी उपलब्ध कराई जाए।

 

सीडीओ ने यह भी निर्देश दिया कि आरबीएसके टीम के वाहनों में लगे जीपीएस की सक्रियता की निगरानी की जाए। संबंधित क्षेत्र के एमओआईसी को वाहन की जीपीएस क्रियाशीलता का प्रमाण-पत्र देना होगा, तभी उसका भुगतान किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की सफलता के लिए यह ज़रूरी है कि निगरानी प्रणाली प्रभावी ढंग से काम करे और जमीनी स्तर तक इसकी पहुँच सुनिश्चित हो।

 

सीडीओ ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इस योजना के अंतर्गत जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में 30 से अधिक प्रकार की बीमारियों की पहचान और उनका उपचार किया जाता है। इनमें जन्मजात हृदय दोष, बाल्यकाल की अंधता, बहरापन, बौद्धिक मंदता, थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, हेमोफिलिया, मिर्गी, मानसिक विकार, त्वचा रोग, पोषण की कमी, दाँत और आँखों की समस्याएँ, शारीरिक अपंगता, जन्मजात असामान्यता, मुँह का तालू न बनना, क्लब फुट, डाउन सिंड्रोम जैसी गंभीर स्थितियाँ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन रोगों की समय पर पहचान से बच्चों को एक बेहतर और स्वस्थ भविष्य की ओर अग्रसर किया जा सकता है।

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