कानपुर का रिजेंसी हॉस्पिटल फिर विवादों में: सर्दी-जुकाम के इलाज में 18 लाख वसूले, मौत के बाद भी थमाया डेढ़ लाख का बिल

 

कानपुर

अच्छे इलाज का सपना दिखाकर मरीजों को पैसों की मशीन समझने का आरोप झेल रहा कानपुर का बदनाम रिजेंसी हॉस्पिटल एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला इतना चौंकाने वाला है कि सुनकर यकीन करना मुश्किल हो—सर्दी-जुकाम के मरीज से अस्पताल ने 18 लाख रुपये वसूल लिए, और मौत के बाद भी परिजनों को डेढ़ लाख का अतिरिक्त बिल थमा दिया गया।

पीड़ित लखनऊ हाईकोर्ट के अधिवक्ता सौरभ नारायण ने बताया कि उनके ससुर गणेशचंद्र (64), जीजीआईसी भौंती में प्रवक्ता पद से सेवानिवृत्त थे। 16 दिसंबर 2024 को सर्दी-खांसी के चलते उन्हें रिजेंसी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां डॉ. निर्मल पांडेय और डॉ. ए.के. सिंह इलाज कर रहे थे।इलाज के दौरान हालात सुधरने के बजाय बिगड़ते गए। 11 जनवरी को प्लेटलेट्स 30 हजार बताए गए और ब्लड अरेंज करने को कहा गया, लेकिन अगले ही दिन सुबह मौत से ठीक पहले की रिपोर्ट में प्लेटलेट्स 8 लाख से अधिक दर्शा दिए गए। परिजनों का आरोप है कि यह गड़बड़ी साफ दिखाती है कि इलाज से ज्यादा जोर दवाइयों, टेस्ट और बिल बनाने पर था। मौत का कारण निमोनिया बताया गया।

शव सौंपने से पहले अस्पताल ने डेढ़ लाख का बिल थमाया। आपत्ति करने पर परिजनों को धमकाया गया और आखिरकार पुलिस बुलाने के बाद शाम 5 बजे शव दिया गया।पीड़ित का कहना है कि अस्पताल ने दवाओं और इलाज के असली बिल देने में टालमटोल की। कई शिकायतों के बाद जब पक्के बिल दिए गए, तब भी इलाज में लापरवाही की जांच नहीं हुई। दोबारा अपील पर डीएम के निर्देश पर सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है।इस अस्पताल की मनमानी को लेकर बिठूर के विधायक अभिजीत सिंह सांगा भी मुख्यमंत्री योगी से शिकायत कर चुके हैं। पहले भी यहां सीजीएचएस घोटाले की जांच हुई थी, जो बाद में ‘गांधीजी की कृपा’ से ठंडे बस्ते में चली गई। इस बार भी देखना होगा कि कार्रवाई होती है या मामला फिर दबा दिया जाता है।

अस्पताल प्रबंधन से पक्ष जानने के लिए डॉ. अतुल कपूर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *