कानपुर में भव्य आयोजन के साथ मनाया गया विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस

 

1947 की त्रासदी को जन-जन तक पहुंचाने के लिए गोष्ठियां, पद यात्राएं और डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन

 

कानपुर। स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पूर्व 14 अगस्त को कानपुर विश्वविद्यालय के रानी लक्ष्मीबाई ऑडिटोरियम में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 1947 में भारत के विभाजन के दौरान पाकिस्तान में हिंदू, सिख, पंजाबी और सिंधी समाज पर हुए अत्याचार, नरसंहार और विस्थापन की विभीषिका को भावपूर्ण ढंग से स्मरण किया गया।भाजपा कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल ने कहा कि आज़ादी का पर्व हम 15 अगस्त को पूरे उत्साह से मनाते हैं, लेकिन इसके एक दिन पहले 14 अगस्त 1947 को जो अमानवीय त्रासदी हुई, वह भारतीय इतिहास का काला अध्याय है। लाखों लोगों को धार्मिक हिंसा, जबरन पलायन और अपनों के बिछोह का दर्द सहना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस स्मृति दिवस का उद्देश्य भावी पीढ़ी को विभाजन के सबक से अवगत कराना और राष्ट्रीय एकता का संकल्प मजबूत करना है।जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार जिले में इस दिवस को भव्य तरीके से मनाया गया। गोष्ठियां, पद यात्राएं और डॉक्यूमेंट्री फिल्म के प्रदर्शन के जरिए आमजन को विभाजन की सच्ची घटनाओं से रूबरू कराया गया। उन्होंने कहा कि यह अवसर उन सभी पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने का है, जिन्होंने इस त्रासदी में अपने घर-परिवार और जीवन खोया।क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी अनूप अवस्थी ने बताया कि कार्यक्रमों में भाजपा के वरिष्ठ नेता विभिन्न जिलों में मुख्य वक्ता और अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विभाजन के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डालते हुए भावी पीढ़ी को राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने का संदेश दिया।कार्यक्रम के दौरान विभाजन पीड़ित परिवारों की स्मृतियां, संघर्ष की कहानियां और उनके साहस के किस्से साझा किए गए। पूरे सभागार में भावुक माहौल रहा और मौन रखकर विभाजन में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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