कानपुर मेट्रो कॉरिडोर-2; डिपो के लिए 6 लाइनें बनकर तैयार, बाकी 9 पर तेजी से चल रहा काम
37.50 एकड़ में तैयार हो रहे मेट्रो डिपो के लिए ट्रैक का काम पूरा होने के बाद गुजरात से लाई जाएंगी ट्रेनें.
कानपुर शहर में मेट्रो के कॉरिडोर-2 के तहत सीएसए (चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय) से बर्रा-8 के बीच निर्माण कार्य तेजी के साथ चल रहा है. इसी के साथ यूनिवर्सिटी में करीब 37.50 एकड़ तैयार हो रहे मेट्रो डिपो के लिए भी ट्रैक निर्माण के काम ने रफ्तार पकड़ ली है. यहां 15 लाइनें बिछाई जानी हैं, जिससे मेट्रो ट्रेनें पहुंच सकें, जिसमें से 6 कंप्लीट हो चुकी हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि महज कुछ महीनो के अंदर ही इस कॉरिडोर के लिए ट्रेनें डिपो तक पहुंचने लगेंगी. कॉरिडोर-2 के लिए कुल 10 ट्रेन प्रस्तावित हैं, जिनमें प्रत्येक में तीन कोच होंगे. बता दें कि कॉरिडोर-1 के तहत फिलहाल कानपुर आईआईटी से कानपुर सेंट्रल स्टेशन के बीच मेट्रो दौड़ रही है. जिसमें 16 स्टेशन हैं और इनमें 5 अंडरग्राउंड हैं.सीएसए यूनिवर्सिटी परिसर में तैयार हो रहे कॉरिडोर-2 डिपो में कुल 15 ट्रैक तैयार करने की योजना है. 6 ट्रैक के निर्माण के बाद बाकी बचा काम तेजी से किया जा रहा है. सभी ट्रैक के निर्माण का काम पूरे होते ही सावली प्लांट गुजरात से ट्रेनों के आने का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा. सीएसए परिसर में जो 15 लाइनें तैयार हो रही हैं, इनका इस्तेमाल अलग-अलग कामों के लिए होगा. चार लाइनों का प्रयोग जहां वर्कशॉप के लिए किया जाएगा, वहीं चार का स्टेबलिंग के लिए, चार का शटिंग के लिए, एक का कोच अनलोडिंग के लिए, एक का पिट व्हील और एक का टेस्ट ट्रैक के रूप में होगा. स्टेबलिंग यानी ट्रेनों को खड़ी करने के लिए निर्धारित चार में से तीन लाइनों का निर्माण का काम पूरा हो चुका है. इसके अलावा सेटिंग के लिए भी निर्धारित 4 में से दो लाइनें तैयार हो चुकी हैं.ट्रेनों को एक से दूसरी लाइन पर स्थानांतरित करने के लिए 6 लाइनों के साथ पांच टर्न आउट स्विच भी तैयार किया जा चुके हैं. इन्हीं टर्न आउट स्विच की मदद से ट्रेनों की सेटिंग ओवरटेकिंग और स्टेबलिंग जैसी गतिविधियां बड़ी ही आसानी से की जा सकेंगी. बता दें कि मेट्रो डिपो में बैलास्टेड-लेस (गिट्टी-सहित) और बैलास्टेड, दोनों तरह के ट्रैकों को बिछाया जा रहा है. हालांकि, यहां के अधिकांश कार्यों के लिए बैलास्टेड ट्रैक का ही प्रयोग होना है. इस बारे में यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने बताया कि, कानपुर में कॉरिडोर-1 के बैलेंस क्षेत्र और कॉरिडोर-2 डिपो, दोनों ही स्थान पर ट्रैक बिछाने का काम तेजी के साथ चल रहा है. बारादेवी से नौबस्ता तक एलिवेटेड क्षेत्र में ट्रैक के साथ-साथ सिग्नलिंग, टेलीकॉम और इलेक्ट्रिकल सिस्टम का काम भी लगातार प्रगति पर है. वही, कॉरिडोर-2 डिपो में ट्रैक बिछाने के साथ-साथ थर्ड रेल सिस्टम इंस्टॉलेशन का काम भी काफी तेजी के साथ किया जा रहा है.बता दें कि कानपुर मेट्रो कॉरिडोर प्रथम 29 दिसंबर 2021 से कॉरिडोर शुरू हुआ. पहले 11 स्टेशन थे, अब कुल 16 हो गए हैं. 23 मई 2025 को अंडरग्राउंड 5 स्टेशन भी जुड़ गए. जिसके बाद संख्या 16 हो गई. कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-2 में सीएसए से बर्रा-8 के बीच की लंबाई 8.60 किलोमीटर है. जिसमें 4.10 किलोमीटर का जो हिस्सा है, वह अंडरग्राउंड है. इसमें 8 स्टेशनो के बीच चलने के लिए 10 ट्रेन आएंगी. कॉरिडोर-2 पूरा होते ही कानपुर के विकास को गति मिलेगी.
