नेपाल की उठापटक में कनपुरिया कारोबार प्रभावित

कानपुर: नेपाल में राजनीतिक उठापटक और सत्ता पलट की स्थिति ने वहां की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत के व्यापार को भी गहरी चोट पहुंचाई है. कानपुर और उत्तर प्रदेश से नेपाल को होने वाला निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. कारोबारी परेशान हैं, क्योंकि कई ऑर्डर होल्ड पर चले गए हैं और पहले से भेजे गए एडवांस ऑर्डर भी फंस गए हैं.

नेपाल को जाता है कानपुर का बड़ा निर्यात

कानपुर से हर साल करीब 1000 करोड़ रुपये का व्यापार नेपाल के साथ होता है. यहां से खाद्य पदार्थ, चावल, आलू, प्याज, हरी सब्जियां, केमिकल, कॉस्मेटिक, मशीनरी, ई-रिक्शा, कंक्रीट मिक्सर मशीन, खाद्य तेल, लेदर बेल्ट, पर्स, आयरन-स्टील, मसाले, डिटर्जेंट, साबुन और नमकीन जैसे तमाम उत्पाद नेपाल को भेजे जाते हैं. वहीं उत्तर प्रदेश स्तर पर देखा जाए तो वर्ष 2024-25 के बीच लगभग 9500 करोड़ रुपये का निर्यात नेपाल को किया गया. इन आंकड़ों से साफ है कि नेपाल भारत और खासकर यूपी के लिए एक बड़ा व्यापारिक केंद्र है. भारत जिन पांच प्रमुख देशों को सबसे ज्यादा निर्यात करता है, उनमें नेपाल भी शामिल है.

नेपाल की मौजूदा स्थिति ने कानपुर के व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. जिन उत्पादों के ऑर्डर पहले ही भेजे जा चुके थे, वे वहीं अटके हुए हैं. वहीं जिन ऑर्डरों को लेकर व्यापारी आगे की योजना बना रहे थे, वे भी अब ठप हो गए हैं. कारोबारी नए ऑर्डरों की उम्मीद नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि वहां हालात बिगड़ने से अनिश्चितता का माहौल है. इस वजह से कानपुर के उद्यमियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

फेडरेशन फ़ॉर इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि नेपाल भारत के लिए एक बड़ा निर्यात के लिहाज से केंद्र है. वहीं नेपाल के हाल खराब होने से उत्तर प्रदेश और भारत पर भी इसका असर पड़ रहा है. कानपुर से कई ऐसे उत्पाद हैं जो नेपाल को जाती थी, लेकिन अब ऑर्डर बीच में फंस गए हैं और कारोबारियां वहां ऑर्डर भेजने से भी डर रहे हैं.

नेपाल में सत्ता संकट और 48 घंटे से बिगड़े हालात का असर भारत पर भी दिख रहा है. भारत नेपाल में बड़ी संख्या में सामान निर्यात करता है, लेकिन अब वहां की अस्थिरता से दोनों देशों के कारोबारी नुकसान झेल रहे हैं. कानपुर जैसे औद्योगिक शहर का नेपाल से गहरा व्यापारिक रिश्ता है और मौजूदा हालात ने यहां के व्यापारियों की नींद उड़ा दी है. कारोबारियों का कहना है कि जब तक नेपाल में स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक व्यापार पटरी पर आना मुश्किल है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *