*एक दिसंबर 2025 को हम गीता जयंती का शुभ और पावन पर्व मना रहे हैं—वह दिव्य दिन जब भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का अमृत उपदेश दिया था। यह सिर्फ एक धार्मिक अवसर नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाला आध्यात्मिक प्रकाश है। गीता जयंती हमें यह स्मरण कराती है कि मानव जीवन में कर्तव्य, श्रद्धा, निस्वार्थ कर्म, धैर्य और भक्ति का कितना गहरा महत्व है।*
श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने हजारों वर्ष पहले थे। जीवन में जब भ्रम, भय, तनाव और निर्णयहीनता बढ़ जाती है, तब गीता के उपदेश व्यक्ति को आंतरिक शक्ति और स्पष्टता प्रदान करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था—“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”, यानी मनुष्य को केवल अपना कर्म करना है, फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। यह संदेश आज के युग में भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जहाँ हर व्यक्ति परिणामों की चिंता में तनावग्रस्त रहता है।
गीता जयंती का यह पावन दिन हमें यह सिखाता है कि धर्म का अर्थ केवल पूजा नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों को निष्ठा, सत्य और न्याय के साथ निभाना भी है। श्रीकृष्ण ने जीवन में संतुलन का महत्व समझाया—न अधिक मोह, न अधिक क्रोध, न अधिक दुख, न अधिक सुख में डूबना। जीवन का हर क्षण कर्म करने, सीखने और आगे बढ़ने का अवसर है।
इस दिन भक्तजन उपवास, पूजा, श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ, गीता यज्ञ, भगवत कथा और श्रीकृष्ण की आराधना करते हैं। कई स्थानों पर गीता पारायण, शोभायात्रा, सत्संग, भजन-कीर्तन और वृक्षारोपण के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। गीता का पाठ करना व्यक्ति के मन को शांत, बुद्धि को स्थिर और हृदय को निर्मल बनाता है।
गीता जयंती हमें यह भी याद दिलाती है कि जीवन में आने वाले संघर्ष, चुनौतियाँ और उलझनें ही हमें मजबूत बनाती हैं। श्रीकृष्ण कहते हैं कि आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है, इसलिए व्यक्ति को भय, निराशा और असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए। जीवन में हमेशा दृढ़ निश्चय, सकारात्मक सोच और प्रभु की कृपा पर विश्वास रखना चाहिए।
आज के इस पावन अवसर पर हम सभी को संकल्प लेना चाहिए कि हम गीता के उपदेशों को केवल पढ़ेंगे ही नहीं, बल्कि जीवन में उतारेंगे। नकारात्मक भावों से दूर होकर सत्य, प्रेम, करुणा और कर्तव्य के मार्ग पर चलें।
गीता जयंती 2025 का यह पावन अवसर हम सबके जीवन में प्रकाश, ज्ञान, संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आए।
जय श्रीकृष्ण!
