*बिग न्यूज अपडेट*

 

सोशल मीडिया के चक्कर में खुल गया बडा़ अपराध

 

*सोशल मीडिया के चक्कर में फँस गई नौकरी,खुल गई 35 साल पुरानी पोल*

 

*केस्को से रिटायर्ड बाप ने ही लडा़ था चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बेटे का मुकदमा*

 

हाइकोर्ट इलाहाबाद, लेबरकोर्ट कानपुर को झूठा हलफनामा देकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से बना था केस्को अधिकारी

 

*चेयरमैन यूपीपीसीएल आशीष कुमार गोयल ने दिए जाँच के आदेश*

 

सोशल मीडिया जहां एक ओर मनोरंजन का साधन है वहीं दूसरी ओर यह कभी कभी गले की फाँस बन जाती है केस्को मुख्यालय में तैनात विजय त्रिपाठी पुत्र आर0 एम0 त्रिपाठी के साथ भी यही घटना हुई

 

सन् 1990 में केसा भर्ती में केस्को से ही बाबू पद पर रिटायर्ड आर0 एम0 त्रिपाठी के पुत्र विजय त्रिपाठी की नौकरी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में लगी थी

 

वर्ष 1995 में केस्को के रिटायर्ड पिता आर0एम0 त्रिपाठी ने अपने पुत्र को बाबू बनवाने के लिए एक मुकदमा संख्या 208/1995 केस्को के विरूद्ध श्रम न्यायालय तृतीय कानपुर नगर की कोर्ट में यह कहते हुए दर्ज करा दिया कि उसके पुत्र विजय त्रिपाठी से केस्को बाबू का काम ले रहा है जबकि वो चतुर्थ श्रेणी में भर्ती हुआ है मामले में जब श्रम न्यायालय ने विजय त्रिपाठी की शैक्षिक योग्यता का हलफनामा माँगा तो दोनों पिता पुत्र ने श्रम न्यायालय को गुमराह करते हुए विजय त्रिपाठी को 1995 में इंटरमीडिएट बता दिया जबकि नौकरी के दौरान ही वो वर्ष 1990,1991,1992 में तीन साल बीएससी करता रहा यदि विजय त्रिपाठी न्यायालय को बीएससी बता देता तो केस निश्चित रूप से हार जाता क्योंकि नौकरी के दौरान बीएससी करने की अनुमति यूपीपीसीएल के नियमानुसार विभाग से ही लेनी होती है जो विजय त्रिपाठी ने ली ही नहीं थी

 

रेगुलर पढाई के साथ रेगुलर नौकरी कर वेतन लेने के कारण विजय त्रिपाठी यह साबित ही नहीं कर सकते थे कि उन्होंने बाबू पद का कार्य कभी किया इसलिए दोनों पिता पुत्र ने झूठा हलफनामा न्यायालय में दाखिल कर दिया

चूँकि विजय त्रिपाठी के पिता आर0 एम0 त्रिपाठी केस्को से ही रिटायर्ड कर्मचारी थे उन्हें केस्को का लूजपोल अच्छी तरह से पता था मामलें मे झूठे हलफनामे का संज्ञान लेते हुए श्रम न्यायालय ने विजय त्रिपाठी के पक्ष में फैसला सुना दिया

 

मामला हाईकोर्ट इलाहाबाद पहुँचा वहाँ पर केस्को विभाग की ओर से अपील रिट संख्या 26483/1998 दाखिल की गई

 

हाइकोर्ट इलाहाबाद ने 1998 में भी विजय त्रिपाठी पुत्र आर0 एम0 त्रिपाठी से उनकी शैक्षिक योग्यता का हलफनामा माँगा तो दोनों पिता पुत्र ने हाइकोर्ट इलाहाबाद को भी झूठा हलफनामा देकर 1998 में बताया कि विजय त्रिपाठी की शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट विज्ञान सेकेंड डिवीजन है जबकि वो 1992 में ही रोल नंबर 50373 क्राइचर्च कॉलेज कानपुर से बीएससी मैथ सेकेंड डिवीजन में पास थे लेकिन यह बात भी दोनों पिता पुत्र ने हाइकोर्ट इलाहाबाद से छुपा झूठा हलफनामा दे दिया

 

हाइकोर्ट इलाहाबाद ने भी झूठे हलफनामे को आधार मानते हुए फैसला विजय त्रिपाठी के पक्ष में सुना उसे श्रमिक से बाबू बनाने व पदनाम वेतनमान देने के निर्णय सुना दिया

 

केस्को में विजय त्रिपाठी श्रमिक से बाबू और बाबू से वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी बन गया वर्ष बीतते चले गए इस घटना के 34 वर्ष केस्को महामंत्री दिनेश सिंह भोले को एक गोपनीय लेटर विजय त्रिपाठी के संबंध मे प्राप्त हुआ जिसमें विजय त्रिपाठी और इनके पिता की काली करतूतें लिखी थी

 

केस्को महामंत्री दिनेश सिंह भोले अपने स्तर से विजय त्रिपाठी की सर्विस बुक मेउनकी शैक्षिक योग्यता का पता लगाया तो उनकी शैक्षिक योग्यता सर्विस बुक में इंटरमीडिएट विज्ञान सेकेंड डिवीजन दर्ज थी जबकि विजय त्रिपाठी फेसबुक पर खुद को बीएससी उत्तीर्ण लिखते थे

 

मामले में पूरी जानकारी करने के लिए केस्को महामंत्री दिनेश सिंह भोले ने छात्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर व क्राईसचर्च कॉलेज के बाबूओं से संपर्क किया तो पता चला कि विजय त्रिपाठी पुत्र आर0 एम0 त्रिपाठी रोल नंबर 50373 क्राइचर्च कॉलेज वर्ष 1992 कुल अंक 1650 प्राप्तांक 699 द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण है

 

मामले की शिकायत केस्को महामंत्री दिनेश सिंह भोले ने चेयरमैन यूपीपीसीएल आशीष कुमार गोयल से की तो उन्होंने इस संबंध में जाँच मुख्य अभियंता हाइडिल उत्तम कुमार सक्सेना को दी है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *