कानपुर; दिनांक- 23.08.2025

*कानपुर मेट्रो डिपो में स्थापित 1 मेगावाट सोलर प्लान्ट से 2 साल में हुई 2 करोड़ रुपए की बचत*

 

*साल में लगभग 10.80 लाख यूनिट बिजली उत्पादन की क्षमता, सालाना एक करोड़ रुपए की बचत*

 

*धरती पर 8900 पेड़ लगाने के बराबर कार्बन उत्सर्जन में कमी*

 

पर्यावरण संरक्षण के प्रति उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी) ने सदैव अपनी प्रतिबद्धता प्रकट की है तथा पर्यावरण एवं ऊर्जा संरक्षण के लिए अपनी मेट्रो परियोजनाओं में विभिन्न प्रावधान भी सुनिश्चित किए हैं। इसी दिशा में एक अहम मील का पत्थर हासिल करते हुए अगस्त, 2023 में गुरुदेव चौराहा स्थित कानपुर मेट्रो डिपो में एक मेगावाट का सोलर प्लान्ट स्थापित कर बिजली उत्पादन आरंभ किया गया था। सालाना लगभग 10 लाख 80 हजार यूनिट बिजली उत्पादन क्षमता वाले इस प्लांट से अब तक 2 करोड रुपये की बचत हुई है, साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिली है।

 

*कार्बन उत्सर्जन में 770 मीट्रिक टन की कमी*

कानपुर मेट्रो ने गुरूदेव चौराहा स्थित मेट्रो डिपो के ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर (ओसीसी) बिल्डिंग की छत पर लगभग 10,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में यह सोलर प्लांट स्थापित किया है। इसके अंतर्गत लगभग 3000 सोलर पैनल्स लगाए गए हैं। सोलर प्लांट द्वारा विद्युत उत्पादन से कानपुर मेट्रो को सालाना लगभग 770 मीट्रिक टन तक कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिल रही है जो धरा पर लगभग 8900 वृ़क्ष लगाने के बराबर है। इस सोलर प्लांट से मेट्रो का बिजली खरीदने में आने वाला व्यय भी कम हुआ है और अब तक लगभग 2 करोड़ रुपए तक की बचत हो चुकी है।

 

*हाल ही में मनाया गया था अक्षय ऊर्जा दिवस*

बता दें कि हर साल 20 अगस्त को अक्षय ऊर्जा दिवस के रूप में मनाया जाता है। कानपुर मेट्रो सोलर प्लांट के अलावा एलिवेटेड मेट्रो स्टेशनों की छतों के लिए ट्रांसलुसेंट शीट का भी प्रयोग करता है जिससे दिन में बिजली की बचत होती है।

 

*कैसे होती है बचत? कहां इस्तेमाल होती है सोलर प्लान्ट से बनी बिजली?*

सोलर प्लान्ट से जितनी भी बिजली का उत्पादन होता है, उसे स्थापित सिस्टम में वापस से फ़ीड कर दिया जाता है। ऐसे में, नियमित तौर पर आने वाले बिल में कुल इस्तेमाल की गई बिजली यूनिट से, मेट्रो सिस्टम द्वारा वापस फ़ीड की गई बिजली यूनिट को घटाकर, कानपुर मेट्रो को शेष यूनिट के लिए बिजली बिल का भुगतान करना होता है; और इस तरह से ऊर्जा एवं आर्थिक व्यय दोनों ही की बचत होती है।

 

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक श्री सुशील कुमार ने कहा कि, ‘‘अन्य सार्वजनिक परिवहन के साधनों की तुलना में मेट्रो पर्यावरण की सबसे अच्छी मित्र है क्योंकि मेट्रो प्रणाली जीरो कार्बन एमिशन के साथ संचालित होती है। यूपीएमआरसी ने परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और उनकी स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सौर ऊर्जा के अलावा ट्रेन और लिफ्ट में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग, कार्बन डाईऑक्साइड सेंसर आधारित एच.व्ही.ए.सी. नियंत्रण प्रणाली, एलईडी लाइटिंग का प्रयोग आदि कई उपाय किए हैं।‘‘

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