कानपुर
करोड़ों का केस्को ट्रांसफार्मर जला, अधिशासी अभियन्ता की जगह संविदा एसएसओ को किया निष्कासित
कानपुर के गोविंद नगर डिविजन के अंतर्गत आने वाले विद्युत कॉलोनी 33/11 में 10 एमबीए का पावर ट्रांसफार्मर 8 तारीख को डैमेज हो गया। इस घटना ने केस्को विभाग की कार्यशैली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये के ट्रांसफार्मर का इस तरह जलना न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि विभागीय लापरवाही की ओर भी इशारा करता है।गौरतलब है कि हैरिस गंज में ट्रांसफार्मर के डैमेज होने के बाद वहाँ के अधिशासी अभियंता राजेंद्र कुमार का तबादला कर गोविंद नगर डिविजन में किया गया व्या। परंतु, अधिशासी अभियंता राजेंद्र कुमार और उनके साथ एसडीओ पंकज कुमार के नेतृत्व में भी हालात जस के तस बने हुए हैं। इन दोनों अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा अब गोविंद नगर डिविजन के उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। अधिकारियों की लापरवाही और विभागीय अनदेखी के कारण इस क्षेत्र में एक और पावर ट्रांसफार्मर जल गया है, और विभाग के अधिकारी इस गंभीर स्थिति को संभालने में विफल साबित हो रहे हैं। इस घटना ने विभाग के उच्च अधिकारियों के कामकाज पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। केस्को विभाग के शीर्ष अधिकारी एक ओर विभाग के केंद्रीकरण (सेंट्रलाइजेशन) की बात कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी टीमें अपने डिविजन ही सही तरीके से नहीं संभाल पा रही हैं। इस घटनाक्रम में न तो कोई असामान्य गर्मी थी, जिससे बिजली लोड बढ़ने की उम्मीद की जा सकती थी, और न ही कोई प्राकृतिक कारण थे। यह पूरी तरह से विभागीय लापरवाही और ट्रांसफार्मर की समय पर देखरेख न होने का परिणाम है।
मामले में यूपीपीसीएल नियमावली के अनुसार 10 एमबीए ट्रांसफार्मर की जिम्मेदारी अधिशासी अभियन्ता की होती है
यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है कि 1-1 करोड़ रुपये के पावर ट्रांसफार्मर अगर इस तरह जलते रहेंगे, तो विभाग की आर्थिक स्थिति और संसाधनों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जवाबदेही किसकी होगी? क्या विभाग के अधिकारी इस प्रकार के घटनाओं की जवाबदेही से बच सकते हैं? दौरा जब करोड़ों की लागत वाले ट्रांसफार्मर यूँ ही खराब होते रहेंगे और आम जनता को बिजली आपूर्ति की असुविधा झेलनी पड़ेगी, तो इससे केस्को की कार्यक्षमता और विश्वासनीयता पर गहरा असर पड़ेगा।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो गया है कि केस्को विभाग अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह से विमुख हो चुका है। जब अधिकारी अपने डिविज़न तक को संभाल नहीं पा रहे हैं, तो केंद्रीकृत व्यवस्था में उनके काम करने की क्षमता पर भी संदेह पैदा होता है।
