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*कानपुर के निजी अस्पताल में इलाज में लापरवाही से महिला की मौत, परिजनों ने NHRC में दर्ज कराई शिकायत*

 

 

कानपुर निवासी पीयूष त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि उनकी माँ, मंजू त्रिपाठी (उम्र 56 वर्ष) की मृत्यु एक निजी अस्पताल में लापरवाही और अमानवीय चिकित्सकीय लापरवाही के कारण हुई है। इस मामले में पीड़ित ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की माँग की है।

 

 

पीयूष त्रिपाठी के अनुसार, उनकी माँ को 27 मार्च 2025 को पेट दर्द की शिकायत पर नजदीकी रक्षा अस्पताल में ले जाया गया। वहाँ डॉक्टरों ने सलाह दी कि मरीज को तुरंत किसी बड़े अस्पताल में भर्ती किया जाए। अगले दिन, 28 मार्च को संजू त्रिपाठी को कानपुर के रीजेंसी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। हॉस्पिटल प्रशासन ने तत्काल इलाज के नाम पर ₹7.5 लाख का खर्च बताया, जिसमें से ₹2.5 लाख तत्काल जमा करने को कहा गया। कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, लेकिन परिवार को कोई रसीद की प्रतिलिपि नहीं दी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि डॉक्टरों की टीम में डॉ. अज़मत हसन, डॉ. मयंक मल्होत्रा, डॉ. गौरव कुमार, डॉ. अवनीत गुप्ता और बाद में सर्जन डॉ. रोहन को जोड़ा गया। 31 मार्च को डॉक्टरों ने कहा कि माँ की आँतों में इंफेक्शन है और तुरंत ऑपरेशन करना होगा। ऑपरेशन से पहले दबाव डाला गया और धमकी दी गई

“अगर आज ऑपरेशन नहीं करवाया तो तुम्हारी माँ मर जाएगी।” इस धमकी के बाद बेटे ने उधार लेकर ₹1.70 लाख जमा किए। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने कहा कि आपकी मां की पूरी आँत निकाल दी गई है और अब जीवन की कोई गारंटी नहीं है। मरीज को ICU से जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। मेडिकल बीमा राशि समाप्त होते ही इलाज रोक दिया गया। 10 अप्रैल को मरीज के शरीर का दाहिना हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया, लेकिन डॉक्टरों ने इसे “कमजोरी” बताया। CT स्कैन के बाद ही पता चला कि मरीज को पक्षाघात (Paralysis) हो चुका है।

 

बीमा की सीमा खत्म होते ही 11 अप्रैल की रात को इलाज पूरी तरह रोक दिया गया और डिस्चार्ज माँगा गया। मरीज की हालत बिगड़ती चली गई और 23 अप्रैल को उनकी मृत्यु हो गई।

 

 

प्रमुख सवाल जो शिकायत में उठाए गए हैं:

 

1. जब डॉक्टरों को ऑपरेशन के खतरे की जानकारी थी तो यह क्यों किया गया?

 

 

2. ऑपरेशन से पहले मरीज़ को धमकी क्यों दी गई?

 

 

3. बीमा खत्म होते ही इलाज क्यों रोका गया?

 

 

4. क्या इस सबमें अस्पताल का व्यावसायिक लाभ शामिल था?

 

पीयूष त्रिपाठी ने आयोग से माँग की है:

 

रीजेंसी हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली की CBI या उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। संबंधित डॉक्टरों और स्टाफ पर हत्या व अमानवीयता का मामला दर्ज हो। अस्पताल की मान्यता तत्काल रद्द की जाए। इलाज के संचालन के लिए पारदर्शी और जवाबदेह सिस्टम बनाया जाए ताकि उनकी माता जी की तरह अन्य किसी तीमारदार और मरीज को मानसिक उत्पीड़न का सामना ना करना पड़े ।

 

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