तेल निकालने की विभिन्न विधियाँ

 

आज दिनांक २०/०९/२०२५ को दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज कानपुर के रसायन विज्ञान विभाग द्वारा यूजी और पीजी की छात्राओं के लिए एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन का शुभारंभ प्राचार्या प्रो वंदना निगम ,निदेशक प्रो अर्चना वर्मा ,प्रो रचना प्रकाश प्रभारी के द्वारा विशिष्ट वक्ता डॉ सुधा अग्रवाल पीपीएन कॉलेज ,रसायन विज्ञान विभाग का स्वागत तुलसी का पौधा देकर किया गया । आपने व्याख्यान में तेल के निष्कर्षण एवं उनकी उपयोगिता पर अवगत कराया कि तेल हमारे दैनिक जीवन का एक अनिवार्य घटक है। भोजन में इसके उपयोग से लेकर सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण और बायो-डीज़ल ईंधन उत्पादन के लिए एक नवीकरणीय संसाधन के रूप में, तेल वर्तमान में बाजार में सबसे महत्वपूर्ण वस्तुओं में से एक है। इसके विभिन्न अनुप्रयोगों की तरह, तेल निष्कर्षण के तरीके भी विविध हैं।

आवश्यक तेल अत्यधिक सांद्रित पदार्थ होते हैं जो फूलों, पत्तियों, तनों, जड़ों, बीजों, छालों, रेजिन या फलों के छिलकों से निकाले जाते हैं। इन तेलों का उपयोग अक्सर उनके स्वाद और चिकित्सीय या गंधयुक्त गुणों के लिए, खाद्य पदार्थों, दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों में होता है।आवश्यक तेलों का पौधों से तेल निकालने का तरीका महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ प्रक्रियाओं में ऐसे विलायकों का उपयोग किया जाता है जो चिकित्सीय गुणों को नष्ट कर सकते हैं। आवश्यक तेल निकालने के कई तरीके हैं, लेकिन गुणवत्ता कभी एक जैसी नहीं रहती। इस अध्ययन का प्राथमिक उद्देश्य औषधीय पौधों से आवश्यक तेलों के निष्कर्षण और स्क्रीनिंग की विभिन्न प्रक्रियाओं का मूल्यांकन करना था जिनका उपयोग हम अपने दैनिक शोध में करते हैं। निष्कर्षण तकनीकों में भाप आसवन, जल आसवन, शीत दाब, स्थैतिकीकरण, अति-क्रिटिकल कार्बन डाइऑक्साइड, उत्प्रवाह और शुष्क आसवन शामिल हैं। इसके बाद, ऊपर उल्लिखित विभिन्न पद्धतियों को लक्षित जैविक परीक्षण के संदर्भ में समूहीकृत और संबोधित किया जा सकता है ताकि युवा शोधकर्ताओं को अपने शोध पर ध्यान केंद्रित करने और उसे निर्देशित करने में मदद मिल सके।सामान्य विधियों में हाइड्रोडिस्टिलेशन, स्टीम डिस्टिलेशन, सॉलिड-लिक्विड एक्सट्रैक्शन, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन, कोल्ड प्रेसिंग और प्रेसिंग शामिल हैं। नई निष्कर्षण विधियों में सुपरक्रिटिकल द्रव निष्कर्षण, आणविक आसवन, एंजाइम-मध्यस्थ निष्कर्षण, माइक्रोवेव-सहायता प्राप्त हाइड्रोडिस्टिलेशन और माइक्रोवेव-सहायता प्राप्त निष्कर्षण शामिल है ।आवश्यक तेलों के जैवसक्रिय प्रोफाइल में मुख्य रूप से टेरपीन (मोनो-, सेस्क्वि- और डाइटरपीन), अल्कोहल, कीटोन और एस्टर शामिल हैं जो उनके रोगाणुरोधी, एंटीऑक्सीडेंट, सूजनरोधी, कवकरोधी और विषाणुरोधी गुणों के लिए जिम्मेदार हैं।व्याख्यान को संपन्न कराने में विभाग की इंचार्ज प्रो रचना प्रकाश (समन्वयक),डॉ अर्चना दीक्षित,डॉ प्रियदर्शनी निरंजन ,डॉ सोनिया रानी एवं डॉ शैल का विशेष योगदान रहा।

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