पंचवटी और गोदावरी का संबंध रामायण के सबसे महत्वपूर्ण कालखंड से है। जब भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी 14 वर्ष के वनवास पर थे, तब उन्होंने अपने वनवास का एक लंबा और मुख्य समय नासिक (महाराष्ट्र) में गोदावरी नदी के तट पर स्थित ‘पंचवटी’ में बिताया था।

 

‘पंचवटी’ का अर्थ है पाँच वट (बरगद) के वृक्षों का समूह। पौराणिक कथा के अनुसार, अगस्त्य मुनि के सुझाव पर भगवान राम ने इसी स्थान को अपनी कुटिया बनाने के लिए चुना था। यहाँ पाँच पवित्र वट वृक्ष आज भी माने जाते हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे पाँच ऋषियों के प्रतीक हैं।

 

एक दिन रावण की बहन शूर्पणखा गोदावरी के तट पर टहल रही थी। भगवान राम के सौंदर्य को देखकर वह उन पर मोहित हो गई और विवाह का प्रस्ताव रखा।

 

श्री राम ने मर्यादावश मना कर दिया और उसे लक्ष्मण के पास भेज दिया।

जब वह नहीं मानी और माता सीता को डराने लगी, तब लक्ष्मण जी ने क्रोध में आकर शूर्पणखा की नाक काट दी।

‘नासिक’ शहर का नाम इसी घटना (नासिका यानी नाक का कटना) के कारण पड़ा है।

 

पंचवटी वही स्थान है जहाँ रावण ने मारीच को सोने के हिरण के रूप में भेजा था।

माता सीता उस हिरण की सुंदरता देख उसे पाने की इच्छा करने लगीं।

भगवान राम उस मृग के पीछे गए, और पीछे से रावण ने साधु का वेष धरकर माता सीता का छल से हरण कर लिया।

जाते समय जटायु (पक्षी राज) ने इसी गोदावरी के आकाश मार्ग में रावण से युद्ध किया था।

 

पंचवटी में गोदावरी नदी के भीतर एक स्थान है जिसे ‘राम कुंड’ कहा जाता है।

माना जाता है कि भगवान राम यहाँ प्रतिदिन स्नान करते थे।

आज भी यह मान्यता है कि यहाँ की गोदावरी धारा में विसर्जित की गई अस्थियाँ जल में पूरी तरह घुल जाती हैं। यहाँ स्नान करने से व्यक्ति को मानसिक शांति और पापों से मुक्ति मिलती है।

 

गोदावरी नदी उस समय की साक्षी रही है जब भगवान राम ने एक साधारण मनुष्य की भांति कष्ट सहे और अपनी लीला रची। इसीलिए नासिक को ‘दक्षिण की अयोध्या’ भी कहा जाता है।

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