उज्जैन का अखंड ज्योति मंदिर हनुमान जी के चमत्कार की वजह से ही जाना जाता है। यहां भक्तों को हनुमान जी की विशेष मूर्ति के दर्शन प्राप्त होते हैं, ऐसी मूर्ति आपको हर जगह देखने को नहीं मिलेगी।

 

यहाँ हनुमान जी की सिंदूरी प्रतिमा स्थापित है। इस मूर्ति को यदि ध्यान से देखें तो इसके पैरों में हनुमान जी ने एक राक्षसी दबा रखी है। कहा जाता है कि लक्ष्मण को बचाने के लिए जब हनुमान जी संजीवनी ला रहे थे तो लंकिनी नामक राक्षसी ने उनका मार्ग रोका था। उस समय हनुमान जी लंकिनी को अपने पैरों के नीचे दबाकर आगे बढ़ गए थे। यहां आप हनुमान जी के ठीक उसी स्वरूप के दर्शन कर सकते हैं। हनुमान जी की ये प्रतिमा दक्षिणमुखी है। इस प्रतिमा में उनके एक हाथ में संजीवनी तो कंधे पर गदा सुशोभित है। उनके हाथों में बाजूबंद, पांव में पाजेब और कलाई में कड़े पहने हुए हैं। हनुमान जी के इस स्वरूप के दर्शन मात्र से ही भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। यहाँ की विशेष बात सिर्फ हनुमान जी की विशेष मूर्ति ही नहीं है बल्कि यहाँ इस मंदिर में 24 घंटे, सातों दिन ज्योति प्रज्वलित रहती है। यह एक अत्यंत विशेष अद्धभुत अखंड ज्योति है। किवदन्ती है कि मंदिर में सुशोभित यह ज्योति अत्यंत चमत्कारी है, इस मंदिर में जलने वाली ज्योति कभी नहीं बुझती है। हनुमान जी का पूरा आशीर्वाद इसी ज्योति में समाया है। इस ज्योति के दर्शन मात्र से ही हनुमान जी अपने भक्तों का कल्याण करते हैं।

 

ऐसी मान्यता है कि इस अखंड ज्योति के दर्शन कर लेने से, व्यक्ति के ऊपर से शनि देव का अशुभ और संकट हमेशा के लिए कट जाता है। यदि शनि ग्रह की स्थिति कुंडली में खराब चल रही हो, तो इस मंदिर में उपस्थित हो कर दर्शन करने से वे समस्याएं कम होने लगती हैं। जो लोग शनि की साढ़ेसाती से पीड़ित हैं, उन्हें उज्जैन के हनुमान जी वाले मंदिर में आकर इस अखंड दीपक के दर्शन अवश्य कर लेने चाहिए। मान्यता है कि यहां आकर दीपक के दर्शन करने और स्वयं यहां आटे का दीपक जला देने से शनिदेव के प्रकोप से मुक्ति मिल जाती है।

 

यहाँ की अन्य विशेष बात है यहां के प्रसाद का चढ़ावा। इस मंदिर में राम भक्त हनुमान को कई प्रकार के प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। यहां भक्त अपनी मनोकामना प्रसाद के माध्यम से लेकर आते हैं। यदि किसी को झगड़े, मुकद्दमों से मुक्ति चाहिए तो यहां पर एक नारियल अर्पित करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। यदि कोई व्यक्ति या स्त्री संतानहीन है, तो वह अखंड ज्योति में तेल का चढ़ावा चढ़ाते है। इसके अलावा सामान्य मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए लोग यहां बड़ी मात्रा में हनुमान जी को रोटी के प्रसाद का भोग लगाते हैं। यह प्रसाद मनोकामना पूर्ति के बाद ही चढ़ाया जाता है।

 

संध्या काल की आरती के समय यहां लगने वाली भक्तों की भीड़ अपार होती है। यहां लोग हनुमान जी की मूर्ति से लेकर अखंड ज्योति और मूर्ति के साथ रखे गए चंदन के गदा का भी दर्शन करते हैं। यह सभी वस्तुएं भक्तों को भक्ति, शक्ति एवं सदबुद्धि प्रदान करती हैं।

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