#कानपुर नगर

 

*कानपुर में 200 साल पुरानी जगन्नाथ रथयात्रा में श्रद्धा और विवाद दोनों साथ-साथ*

 

 

 

कानपुर की ऐतिहासिक और 200 वर्षों से चली आ रही भगवान जगन्नाथ रथयात्रा इस वर्ष भी भव्यता के साथ निकाली गई, लेकिन इस बार श्रद्धा के साथ प्रशासनिक विवाद भी देखने को मिला।

 

रथयात्रा की शुरुआत के साथ ही एक विवाद भी सामने आया। आयोजकों का आरोप है कि पिछले एक सप्ताह से हुई 20 से अधिक बैठकों में लाउडस्पीकरों की संख्या को लेकर कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए गए थे, लेकिन यात्रा के दिन प्रशासन द्वारा अचानक सख्ती बरतते हुए साउंड सिस्टम को सीमित कर दिया गया। आयोजकों के अनुसार, पुलिस ने साउंड वालों के साथ मारपीट करते हुए उन्हें सिर्फ दो साउंड बॉक्स लगाने की अनुमति दी। इस कार्रवाई से नाराज आयोजकों, स्थानीय नेताओं और भक्तों ने यात्रा मार्ग पर ही धरना शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि संत समाज के साथ अभद्रता की गई, जो सनातन धर्म का अपमान है।

 

धरने पर बैठे श्रद्धालुओं ने साफ कहा है कि यह यात्रा पिछले 200 वर्षों से जिस परंपरा के साथ निकलती आई है, उसी प्रकार निकलेगी। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

 

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की शुरुआत जनरलगंज की तंग गलियों में स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से हुई, जो नयागंज, कलेक्टरगंज, फूलबाग, सरसैया घाट होते हुए शिवाला तक पहुंचती है। करीब 5.5 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। विशेष रूप से कोलकाता से आए कारीगरों द्वारा रथ को भव्य रूप से सजाया गया, जिसमें फूलों की अद्भुत सजावट देखने को मिली।

यात्रा के समापन के बाद महाप्रसाद वितरण और भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

 

इससे पहले नगर निगम और पुलिस प्रशासन की ओर से यात्रा मार्ग का निरीक्षण किया गया था। महापौर प्रमिला पांडेय, नगर आयुक्त सुधीर कुमार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने जनरलगंज से लेकर पटकापुर और परेड तक यात्रा मार्ग का जायजा लिया और साफ-सफाई, बिजली व्यवस्था और सड़कों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए थे ।

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